नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2026: आम आदमी पार्टी (आप) के अंदरूनी मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद अब आप नेता सौरभ भारद्वाज ने उनके कामकाज और राजनीतिक रुख पर खुलकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में राघव चड्ढा ने जिस तरह की “नरम राजनीति” अपनाई, वही उनके खिलाफ कार्रवाई की एक बड़ी वजह बनी।
दरअसल, राघव चड्ढा ने 2 अप्रैल को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने राज्यसभा में उपनेता के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उठाए गए मुद्दों का जिक्र किया था। इस वीडियो के जवाब में सौरभ भारद्वाज ने अपनी प्रतिक्रिया दी और पार्टी की मूल विचारधारा की याद दिलाई।
‘डर के आगे राजनीति नहीं’ – भारद्वाज का संदेश
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आम आदमी पार्टी की पहचान हमेशा से बेखौफ राजनीति रही है। उन्होंने कहा, “हम सब अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं और हमने यही सीखा है कि जो डर गया, वो मर गया।” उनके मुताबिक, जनता के मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से उठाना ही पार्टी का मूल सिद्धांत रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज के माहौल में जो भी नेता सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाती है, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उसे दबाने की कोशिश होती है और केस लगाए जाते हैं। ऐसे में विपक्ष का काम और ज्यादा जिम्मेदार हो जाता है।
‘सॉफ्ट पीआर से नहीं चलेगी राजनीति’
भारद्वाज ने यह भी कहा कि संसद में छोटी पार्टियों को सीमित समय मिलता है, इसलिए उस समय का उपयोग गंभीर और बड़े मुद्दों को उठाने के लिए होना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर कोई नेता सदन में छोटे-मोटे मुद्दों पर बात करेगा, तो देश के बड़े सवाल पीछे छूट जाएंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों से पहले कई राज्यों में वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ की जा रही है और फर्जी वोट बनाकर चुनावी सिस्टम को प्रभावित किया जा रहा है। भारद्वाज के अनुसार, ऐसे मुद्दों पर खुलकर बोलना जरूरी है, लेकिन राघव चड्ढा ने इस दिशा में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई।
विपक्षी एकजुटता पर भी उठाए सवाल
सौरभ भारद्वाज ने यह भी कहा कि जब विपक्षी दल चुनाव आयोग के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहे थे, तब राघव चड्ढा ने उसका समर्थन नहीं किया। उनके मुताबिक, यह एक ऐसा मुद्दा था जिस पर सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब संसद में विपक्ष वॉकआउट करता है, तब भी राघव चड्ढा कई बार उसमें शामिल नहीं होते। इससे पार्टी की आक्रामक विपक्षी भूमिका कमजोर पड़ती है।
पंजाब और गुजरात के मुद्दों पर चुप्पी का आरोप
भारद्वाज ने कहा कि राघव चड्ढा, जो पंजाब से आते हैं, वहां के मुद्दों को भी मजबूती से नहीं उठा पाए। इसके अलावा उन्होंने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पार्टी के करीब 160 कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किए गए और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन इस पर भी राघव की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई।
‘पुरानी राह से भटक गए हैं’
सौरभ भारद्वाज ने भावुक अंदाज में कहा कि पार्टी ने हमेशा संघर्ष और बेखौफ राजनीति का रास्ता अपनाया है। उन्होंने याद दिलाया कि जब पार्टी के बड़े नेता जेल में थे और कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे थे, उस समय भी डटे रहना ही असली राजनीति थी।
उन्होंने राघव चड्ढा से सवाल करते हुए कहा कि उन्हें सोचना चाहिए कि वे किस रास्ते से चले थे और अब कहां पहुंच गए हैं। उनके अनुसार, देश को मजबूत और स्पष्ट आवाज वाले नेताओं की जरूरत है, न कि “सॉफ्ट” मुद्दों पर राजनीति करने वालों की।
अंत में भारद्वाज ने कहा कि अगर राजनीति में प्रभाव डालना है, तो सरकार से सीधे और बेखौफ सवाल करने होंगे। वरना न तो पार्टी मजबूत होगी और न ही जनता का भरोसा कायम रह पाएगा।
Correspondent – Shanwaz Khan


