नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2026: हाल ही में सामने आई उन खबरों को केंद्र सरकार ने पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि ईरान से कच्चा तेल लेकर भारत आने वाला एक टैंकर भुगतान से जुड़ी समस्याओं के कारण बीच रास्ते से चीन की ओर मुड़ गया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत को कच्चे तेल के आयात में किसी भी प्रकार की पेमेंट संबंधी बाधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है और देश की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है।
मंत्रालय ने कहा कि भारत दुनिया के 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है और तेल कंपनियों को अपनी जरूरत के अनुसार विभिन्न स्रोतों से खरीदारी करने की स्वतंत्रता दी गई है। ऐसे में किसी एक जहाज के रूट बदलने से देश की कुल आपूर्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
रूट बदलना व्यापार का सामान्य हिस्सा
सरकार ने यह भी बताया कि तेल व्यापार में जहाजों का रास्ता बदलना कोई असामान्य घटना नहीं है। आमतौर पर “बिल ऑफ लैंडिंग” में एक से अधिक संभावित पोर्ट का उल्लेख होता है, जहां माल उतारा जा सकता है। समुद्र में चल रहे तेल टैंकर ऑपरेशनल लचीलापन बनाए रखने के लिए अपने गंतव्य को बदल सकते हैं, जिससे व्यापारिक लाभ को अधिकतम किया जा सके।
मंत्रालय के अनुसार, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने तेल व्यापार के इस तकनीकी पहलू को नजरअंदाज करते हुए इसे भुगतान संकट से जोड़ दिया, जो तथ्यात्मक रूप से गलत है।
मीडिया रिपोर्ट्स को बताया भ्रामक
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि मिडिल ईस्ट में सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि पेमेंट से जुड़ी समस्याओं की खबरें पूरी तरह निराधार हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। आने वाले महीनों में भी भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित बनी रहेगी।
एलपीजी सप्लाई को लेकर फैल रही अफवाहों पर भी सरकार ने सफाई दी। मंत्रालय के अनुसार, “सी बर्ड” नाम का एलपीजी जहाज 44 हजार मीट्रिक टन ईरानी गैस लेकर 2 अप्रैल को मंगलुरु पोर्ट पहुंच चुका है और वहां पर अनलोडिंग का काम जारी है। इससे साफ है कि सप्लाई चेन सामान्य रूप से काम कर रही है।
जहाज के रूट बदलने पर क्या कहा गया
जहाज ट्रैकिंग कंपनी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ‘पिंग शुन’ नामक टैंकर, जो पहले गुजरात के वाडिनार पोर्ट की ओर आ रहा था, अब चीन के दोंगयिंग की तरफ बढ़ रहा है। इस बदलाव को कुछ विश्लेषकों ने भुगतान शर्तों से जोड़कर देखा था।
हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि समुद्र में यात्रा के दौरान गंतव्य बदलना पूरी तरह सामान्य प्रक्रिया है। यह न केवल लॉजिस्टिक्स बल्कि व्यापारिक शर्तों, कीमतों और बाजार की मांग पर भी निर्भर करता है।
भारत का ईरानी तेल से पुराना संबंध
भारत लंबे समय तक ईरानी कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के कारण इसमें उतार-चढ़ाव आता रहा है। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि ईरान से तेल खरीदने का निर्णय पूरी तरह तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता पर आधारित होगा।
कुल मिलाकर, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश में न तो तेल की कमी है और न ही भुगतान से जुड़ी कोई समस्या। ऐसे में अफवाहों पर ध्यान देने की बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना जरूरी है।
Correspondent – Shanwaz Khan


