प्रतीक यादव अंतिम यात्रा के दौरान पूरे शहर में भावुक माहौल देखने को मिला। समर्थकों और शुभचिंतकों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी, जबकि बैकुण्ठ धाम में पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
प्रदेश की राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच लोकप्रिय रहे प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा भावुक माहौल में निकाली गई। उनके निधन की खबर से समर्थकों, परिजनों और शुभचिंतकों में गहरा शोक देखने को मिला। अंतिम यात्रा के दौरान सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और हर तरफ “प्रतीक यादव अमर रहें” के नारे गूंजते रहे।
सुबह से ही उनके आवास पर लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। समर्थकों की आंखें नम थीं और हर कोई अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंच रहा था। कई सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। माहौल पूरी तरह गमगीन था और लोगों के चेहरों पर दुख साफ दिखाई दे रहा था।
अंतिम यात्रा जैसे ही शुरू हुई, हजारों की संख्या में लोग उसके साथ चल पड़े। रास्तेभर लोगों ने फूल बरसाकर श्रद्धांजलि दी। कई जगहों पर लोगों ने हाथ जोड़कर उन्हें अंतिम प्रणाम किया। युवाओं में खासा भावनात्मक माहौल देखने को मिला। समर्थकों ने कहा कि प्रतीक यादव हमेशा लोगों की मदद के लिए आगे रहते थे और उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
अंतिम यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई बैकुण्ठ धाम पहुंची, जहां पूरे विधि-विधान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान परिवार के सदस्य बेहद भावुक नजर आए। परिजनों को सांत्वना देने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
अंतिम संस्कार में कई प्रमुख नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए। सभी ने प्रतीक यादव के व्यक्तित्व और समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने हमेशा लोगों की आवाज उठाई और समाज के हर वर्ग के लिए काम किया। यही वजह है कि आज इतनी बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे हैं।
प्रतीक यादव के निधन की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर भी श्रद्धांजलि संदेशों की बाढ़ आ गई। कई नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने उन्हें याद करते हुए भावुक पोस्ट साझा किए। ट्विटर, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनका नाम लगातार ट्रेंड करता रहा।
स्थानीय प्रशासन ने अंतिम यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और किसी तरह की अव्यवस्था न फैले। प्रशासन की निगरानी में पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई।
प्रतीक यादव का जाना उनके समर्थकों और क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि उन्होंने लोगों के दिलों में खास जगह बनाई थी। बैकुण्ठ धाम में अंतिम संस्कार के साथ एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।
Correspondent – Shanwaz Khan


