आसाराम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य संबंधी दावों पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही जमानत याचिका पर आगे विचार किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य संबंधी दावों पर मांगी विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट
नई दिल्ली। दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल से आसाराम की ताजा मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य संबंधी आधार पर राहत देने से पहले सभी चिकित्सीय तथ्यों और मेडिकल दस्तावेजों का गहन परीक्षण किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से यह दलील दी गई कि उनकी उम्र अधिक हो चुकी है और वे कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में उन्हें नियमित इलाज और विशेष चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता है। बचाव पक्ष ने अदालत से स्वास्थ्य के आधार पर जमानत देने की मांग दोहराई।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील पर तुरंत कोई राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि केवल स्वास्थ्य संबंधी दावे पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने कहा कि किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले यह जानना आवश्यक है कि वर्तमान में उनकी वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति क्या है और क्या जेल प्रशासन द्वारा आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिया कि संबंधित अस्पतालों और चिकित्सा विशेषज्ञों की रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की सुनवाई की दिशा तय होगी।
गौरतलब है कि आसाराम विभिन्न आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए जा चुके हैं और वर्तमान में जेल में सजा काट रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए कई बार अंतरिम जमानत अथवा नियमित जमानत की मांग की थी। कुछ अवसरों पर उन्हें सीमित अवधि के लिए चिकित्सा आधार पर राहत मिली, जबकि कई याचिकाओं को अदालतों ने खारिज भी किया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अदालतें केवल उम्र या बीमारी के आधार पर राहत नहीं देतीं। यदि किसी दोषी की ओर से स्वास्थ्य संबंधी आधार पर जमानत मांगी जाती है, तो अदालत यह भी देखती है कि जेल के भीतर पर्याप्त इलाज संभव है या नहीं। यदि आवश्यक चिकित्सा सुविधा जेल प्रशासन उपलब्ध करा सकता है, तो जमानत देने की आवश्यकता कम हो जाती है।
सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि न्यायालय इस मामले में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करना चाहता। अदालत ने कहा कि निष्पक्ष निर्णय के लिए सभी पक्षों की दलीलों और मेडिकल रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण जरूरी है। इसलिए फिलहाल मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही जमानत याचिका पर आगे विचार किया जाएगा।
इस मामले पर देशभर की नजर बनी हुई है क्योंकि यह न केवल एक हाई-प्रोफाइल मामला है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और स्वास्थ्य के आधार पर जमानत देने के मानकों से भी जुड़ा हुआ है। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट आगे का फैसला करेगा।
फिलहाल अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य संबंधी दावों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट के बिना किसी प्रकार की राहत पर विचार नहीं किया जाएगा। ऐसे में अगली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
Correspondent – Shanwaz Khan


