पश्चिम बंगाल के मालदा में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले को लेकर Supreme Court of India ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस घटना को गंभीर मानते हुए चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की जाए। साथ ही राज्य सरकार को भी फटकार लगाते हुए कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं।
यह मामला उस समय सामने आया जब SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से बाहर किए गए लाखों लोगों के दावों और आपत्तियों की जांच के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी दौरान मालदा में प्रदर्शनकारियों ने इन अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और कथित रूप से उन्हें घंटों तक घेरकर रखा। जब अधिकारी वहां से निकलने लगे, तो उनके वाहनों पर पथराव और हमला किया गया।
इस घटना पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें Justice Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice Vipul Pancholi शामिल थे, ने कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि यह सिर्फ न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने का मामला नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा और अधिकार को चुनौती देने जैसा है।
कोर्ट ने Election Commission of India को निर्देश दिया कि जहां-जहां न्यायिक अधिकारी तैनात हैं, वहां पर्याप्त सुरक्षा दी जाए। जरूरत पड़ने पर उनके परिवारों को भी सुरक्षा मुहैया कराई जाए। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि जिन स्थानों पर दावों का निपटारा किया जा रहा है, वहां एक समय में पांच से अधिक लोगों को एकत्रित होने की अनुमति न दी जाए, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
इसके अलावा कोर्ट ने राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों—मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम और एसपी—को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। अदालत ने इन अधिकारियों को 6 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में ऑनलाइन उपस्थित रहने का आदेश दिया है।
घटना की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। इसमें Central Bureau of Investigation (CBI) या National Investigation Agency (NIA) को शामिल किया जा सकता है। जांच एजेंसी को अपनी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपनी होगी।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार के रवैये पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने टिप्पणी की कि राज्य में अधिकारी राजनीतिक भाषा बोलते नजर आते हैं और प्रशासन की निष्क्रियता चिंता का विषय है। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसे पूरी जानकारी है कि घटना में कौन लोग शामिल थे।
बताया गया कि घटना के दौरान स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया धीमी रही और समय पर वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। बाद में उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया, लेकिन तब तक न्यायिक अधिकारियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील Kapil Sibal ने कोर्ट से कुछ टिप्पणियों को हटाने का अनुरोध किया, जिस पर अदालत ने कहा कि वह इस पर विचार करेगी, लेकिन राज्य सरकार को अपने कामकाज से स्थिति सुधारकर दिखानी होगी।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने और अधिकारियों की सुरक्षा से समझौता करने को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मामला अब राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है।
Bengal – Piyush Dhar Diwedi


