नारायण साईं तलाक मामले में कोर्ट ने जानकी देवी को 2 करोड़ एलिमनी देने का आदेश दिया। लंबे विवाद के बाद पारिवारिक न्यायालय का बड़ा फैसला।
धार्मिक गुरु आसाराम के बेटे नारायण साईं से जुड़े तलाक मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। पारिवारिक न्यायालय ने उनकी पत्नी जानकी देवी की याचिका को स्वीकार करते हुए विवाह विच्छेद (तलाक) को मंजूरी दे दी है। साथ ही अदालत ने नारायण साईं को 2 करोड़ रुपये की एलिमनी (स्थायी भरण-पोषण) देने का आदेश भी दिया है।
यह मामला पिछले कई वर्षों से अदालत में लंबित था और अब इस पर अंतिम निर्णय आने के बाद यह एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
अदालत का फैसला और मुख्य बिंदु
पारिवारिक न्यायालय ने याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए सभी प्रमुख आधारों को सही माना। कोर्ट ने यह पाया कि विवाह संबंध लंबे समय से टूट चुके थे और दोनों के बीच वैवाहिक जीवन संभव नहीं रह गया था।
इसके आधार पर अदालत ने तलाक की याचिका को मंजूरी देते हुए जानकी देवी के पक्ष में फैसला सुनाया। साथ ही 2 करोड़ रुपये की एलिमनी देने का आदेश दिया गया, जो इस मामले का सबसे अहम पहलू माना जा रहा है।
शादी और अलगाव की कहानी
जानकारी के अनुसार, नारायण साईं और जानकी देवी का विवाह वर्ष 2008 में हुआ था। हालांकि यह संबंध ज्यादा समय तक नहीं चल पाया।
साल 2013 से ही दोनों अलग-अलग रह रहे थे। याचिका में यह भी कहा गया कि नारायण साईं ने अपनी पत्नी का परित्याग कर दिया था, जिसके बाद से जानकी देवी अपनी मां के साथ रह रही हैं।
यह अलगाव ही इस मामले की जड़ बना और अंततः तलाक तक बात पहुंची।
आरोपों ने बढ़ाया मामला
जानकी देवी द्वारा दायर याचिका में कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। उन्होंने दावा किया कि नारायण साईं ने कभी वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं किए।
इसके अलावा, याचिका में यह भी कहा गया कि उनके अन्य महिलाओं के साथ अनैतिक संबंध रहे हैं। यह आरोप मामले को और संवेदनशील बना देते हैं।
साथ ही, सूरत की अदालत में नारायण साईं के खिलाफ चले रेप केस और उसमें सजा होने का भी उल्लेख किया गया, जिसे कोर्ट में प्रमाण के रूप में पेश किया गया।
कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान नारायण साईं की ओर से उनके वकील द्वारा कोई मजबूत या ठोस तर्क पेश नहीं किया गया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण रहा कि अदालत ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया।
हालांकि, अदालत की कार्यवाही को सार्वजनिक नहीं किए जाने की जानकारी भी सामने आई है, जिससे मामले की कुछ जानकारी सीमित ही रह गई है।
भरण-पोषण और अन्य आदेश
इस मामले में केवल तलाक ही नहीं, बल्कि भरण-पोषण को लेकर भी फैसला दिया गया है।
धारा 125 सीआरपीसी के तहत दायर एक अन्य आवेदन में अदालत ने नारायण साईं को हर महीने 50 हजार रुपये देने का आदेश दिया था।
इसके अलावा, लगभग 50 लाख रुपये की बकाया राशि (एरियर्स) की वसूली की प्रक्रिया भी जारी है।
अधिवक्ता अनुरागचंद्र गोयल के अनुसार, संपत्ति का पूरा विवरण कलेक्टर को सौंप दिया गया है और उसकी जांच चल रही है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
फिलहाल, अदालत के इस फैसले के बाद आगे की रणनीति पर विचार किया जा रहा है। आदेश की विस्तृत प्रति का अध्ययन करने के बाद हाई कोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया जा सकता है।
यह मामला कानूनी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई संवेदनशील पहलू जुड़े हुए हैं।
निष्कर्ष
नारायण साईं और जानकी देवी का यह तलाक मामला केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि एक लंबे कानूनी संघर्ष का परिणाम है। अदालत के फैसले ने इस मामले को एक नई दिशा दी है और यह दिखाता है कि न्याय प्रक्रिया में प्रस्तुत साक्ष्य और तथ्यों का कितना महत्व होता है।
Correspondent – Shanwaz Khan


