उज्जैन की विक्रमादित्य यूनिवर्सिटी के प्रश्नपत्र में विवादित सवाल पर बवाल मचा। प्रशासन ने मामले को जांच समिति को सौंपा, जांच जारी।
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कोई उपलब्धि नहीं बल्कि एक विवादित प्रश्न है। हाल ही में आयोजित परीक्षा के प्रश्नपत्र में पूछे गए एक सवाल ने छात्रों, संगठनों और प्रशासन के बीच बहस छेड़ दी है।
यह मामला बीकॉम, बीबीए और बीसीए तृतीय वर्ष के फाउंडेशन कोर्स की परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें भाषा एवं संस्कृति खंड के अंतर्गत एक प्रश्न पूछा गया— “अल्लाह के सिवा दूसरा कोई नहीं है…”। इस सवाल के साथ चार विकल्प भी दिए गए थे, जिनमें सोमेश्वर, खुदा, शक्तिवान और दंड देने वाला शामिल थे।
जैसे ही यह प्रश्न सामने आया, सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इसे लेकर विरोध शुरू हो गया। कई लोगों ने इसे संवेदनशील बताते हुए आपत्ति जताई और इसे परीक्षा प्रणाली की गंभीर चूक करार दिया।
क्यों उठा विवाद?
यह सवाल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ माना गया, जिसके कारण इसे लेकर विवाद और गहरा गया। कुछ संगठनों ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह के प्रश्न नहीं पूछे जाने चाहिए, क्योंकि इससे छात्रों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
खासकर रतलाम और आसपास के क्षेत्रों में इस मुद्दे को लेकर विरोध दर्ज कराया गया। विरोध करने वालों का कहना है कि शिक्षा के मंच पर किसी भी प्रकार की धार्मिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है।

विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया
मामले के बढ़ते विवाद को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत हरकत में आया। कुलसचिव अनिल कुमार शर्मा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह एक अकादमिक मामला है और इसकी जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
उन्होंने बताया कि यदि किसी प्रश्न को विवादित या अनुचित माना जाता है, तो उसे परीक्षा समिति के पास भेजा जाता है। इस मामले को भी जांच के लिए समिति को सौंप दिया गया है, जहां विषय विशेषज्ञ यह तय करेंगे कि प्रश्न पाठ्यक्रम और मानकों के अनुरूप था या नहीं।
जांच प्रक्रिया जारी
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अगर जांच में यह पाया जाता है कि प्रश्न में कोई गलती या लापरवाही हुई है, तो संबंधित एग्जामिनर को नोटिस जारी किया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
कुलसचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की गहन जांच की जाएगी, ताकि निष्पक्ष निर्णय लिया जा सके।
शिक्षा प्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के प्रश्नों को तैयार करते समय न केवल पाठ्यक्रम बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का भी ध्यान रखना जरूरी है।
ऐसी घटनाएं छात्रों के मन में भ्रम पैदा कर सकती हैं और शिक्षा के माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए आवश्यक है कि भविष्य में इस तरह की गलतियों से बचने के लिए सख्त दिशा-निर्देश बनाए जाएं।
संतुलन की जरूरत
शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान देना और सोच विकसित करना होता है, न कि विवाद खड़ा करना। ऐसे में यह जरूरी है कि विश्वविद्यालय और अन्य शैक्षणिक संस्थान अपने प्रश्नपत्रों में संतुलन और संवेदनशीलता बनाए रखें।
यह मामला सिर्फ एक प्रश्न का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की जिम्मेदारी का संकेत देता है।
निष्कर्ष
उज्जैन की इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा संस्थानों को अपने कंटेंट को लेकर और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है, जो तय करेगी कि यह गलती थी या जानबूझकर किया गया कदम।
Correspondent – Shanwaz Khan


