बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक पार्टियों के बीच महिलाओं को साधने की होड़ तेज हो गई है। बुधवार को आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने पटना में अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दो बड़े ऐलान किए, जिससे सियासी हलचल बढ़ गई है। उन्होंने जीविका दीदियों को स्थायी करने और उन्हें हर महीने 30 हजार रुपये वेतन देने का वादा किया है। साथ ही मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर सीधा हमला बोलते हुए इसे “रिश्वत” करार दिया।
तेजस्वी ने कहा कि नीतीश सरकार महिलाओं को जो 10 हजार रुपये रोजगार सहायता के नाम पर दे रही है, वह दरअसल उधार है, जिसे बाद में वसूला जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 21 लाख महिलाओं के खातों में तीसरी किस्त के रूप में 10 हजार रुपये भेज चुके हैं। अब तक इस योजना से 1.21 करोड़ महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह स्कीम नीतीश के लिए संभावित गेमचेंजर साबित हो सकती है, और शायद इसी वजह से तेजस्वी ने इसका सीधा जवाब देने की रणनीति चुनी है।
महिलाओं को साधने की आरजेडी की कोशिशें पहले से दिख रही हैं। पार्टी ने इस बार 24 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जबकि जेडीयू और बीजेपी ने केवल 13-13 महिला प्रत्याशी उतारे हैं। तेजस्वी का यह ऐलान उसी वोट बैंक को साधने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है, जिसे पिछले चार चुनावों से नीतीश कुमार का मजबूत समर्थन मिला है।
राज्य सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं पहले से लागू की हैं—पंचायत चुनावों में 50 प्रतिशत आरक्षण, सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत रिजर्वेशन और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना उनमें प्रमुख हैं। सितंबर और अक्टूबर में चरणबद्ध तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में 1 करोड़ से अधिक महिलाओं को लाभ मिल चुका है।
ऐसे में तेजस्वी का यह नया वादा सिर्फ चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि नीतीश सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं की कांट्र रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि जीविका दीदियों से किया गया यह वादा महागठबंधन के वोट समीकरण में कितना असर डाल पाता है।


