राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा ने गुरुवार रात दिल्ली के वातावरण को नई ऊर्जा से भर दिया। जैसे ही पुतिन का विशेष विमान पालम एयरपोर्ट पर उतरा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं उनका स्वागत करने मौजूद थे। दोनों नेताओं के बीच हुआ गर्मजोशी भरा आलिंगन भारत–रूस संबंधों की उस ऐतिहासिक निकटता का प्रतीक था, जो दशकों से वैश्विक उतार–चढ़ाव के बावजूद स्थिर बनी हुई है। एयरपोर्ट से दोनों एक ही कार में प्रधानमंत्री आवास पहुंचे, जहां उनके सम्मान में खास डिनर का आयोजन किया गया।
पीएम आवास को भारतीय और रूसी झंडों तथा विशेष लाइटिंग से सजाया गया था, जिससे यह साफ संदेश गया कि भारत इस यात्रा को सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक अहम रणनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है। पीएम मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पुतिन के आगमन का स्वागत करते हुए लिखा कि भारत–रूस की मित्रता समय की कसौटी पर खरी उतरी है और दोनों देशों के नागरिकों के लिए लाभकारी रही है।
दोनों नेताओं की एयरपोर्ट पर सांस्कृतिक प्रस्तुति के दौरान सहज मुस्कानें और हल्की बातचीत यह दर्शाती रही कि उनके व्यक्तिगत रिश्ते कितने मजबूत हैं। महज़ पांच महीने पहले जुलाई 2024 में पुतिन ने मॉस्को में मोदी की मेजबानी की थी, जिसे इस मुलाकात की स्वाभाविक निरंतरता माना जा रहा है।
23वां भारत–रूस शिखर सम्मेलन: क्या है खास?
शुक्रवार को होने वाला 23वां वार्षिक भारत–रूस शिखर सम्मेलन कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। यह यात्रा उस समय हो रही है, जब दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उम्मीद है कि इस बैठक में रक्षा सहयोग, ऊर्जा साझेदारी, अंतरिक्ष व विज्ञान–तकनीक, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे।
रूसी मीडिया एजेंसी TASS ने जानकारी दी है कि दोनों देशों के बीच लगभग 10 सरकारी समझौते और 15 से अधिक कारोबारी कॉन्ट्रैक्ट्स पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इनमें आर्कटिक सहयोग, न्यूक्लियर एनर्जी, रक्षा निर्माण, फार्मा ट्रेड और परिवहन कनेक्टिविटी मजबूती जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।
भारत–रूस व्यापार बढ़ने के बावजूद एक चुनौती भी उभरकर सामने आई है—तेल आयात बढ़ने के कारण ट्रेड डेफिसिट। भारत रूसी बाजारों में अपने फार्मा, ऑटो, कृषि और मरीन उत्पादों की ज्यादा हिस्सेदारी चाहता है। माना जा रहा है कि आज की मीटिंग में दोनों देश 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य घोषित कर सकते हैं।
चीन का ग्लोबल टाइम्स भी बोला—‘दुनिया को सीधा संदेश’
इस यात्रा को सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों की नजर से नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसका भू-राजनीतिक महत्व भी बड़ा माना जा रहा है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इस मुलाकात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पुतिन और मोदी की मुलाकात दुनिया को स्पष्ट संदेश देती है कि भारत और रूस को अलग-थलग करना संभव नहीं है। अखबार के अनुसार पश्चिमी दबावों और प्रतिबंधों के बीच भी दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बरकरार रखी है और संयुक्त सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
ग्लोबल टाइम्स ने यह भी लिखा कि इस यात्रा से यह संकेत जाता है कि विश्व अब बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है और भारत–रूस साझेदारी इस नए संतुलन का महत्वपूर्ण स्तंभ बनने जा रही है।
आज दिनभर का कार्यक्रम और राजधानी में तैयारियाँ
शुक्रवार सुबह राष्ट्रपति भवन में पुतिन का औपचारिक स्वागत होगा, जिसके बाद हैदराबाद हाउस में व्यापक उच्च-स्तरीय वार्ताएं होंगी। दोनों नेता संयुक्त बयान जारी करेंगे। शाम को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ मुलाकात और राजकीय भोज के बाद यह यात्रा अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंचेगी।
दूसरी ओर, राजधानी दिल्ली पुतिन के स्वागत में पूरी तरह सज चुकी है। तीन मूर्ति मार्ग, राजनयिक क्षेत्र, जनपथ और केंद्रीय दिल्ली के कई हिस्सों में बड़े फ्लेक्स, डिजिटल स्क्रीन, होर्डिंग्स और झंडे लगाए गए हैं। सड़कें सुरक्षा और स्वागत दोनों की तैयारियों से चमक उठी हैं।
पुतिन की यह यात्रा भारत–रूस रिश्तों की मजबूती और वैश्विक मंच पर दोनों देशों की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में एक अहम मोड़ मानी जा रही है।
Correspondent – Shanwaz khan


