धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा की मांग को लेकर संसद का माहौल एक बार फिर गरमा गया है। राज्यसभा में कांग्रेस ने पेपर लीक विवाद पर सरकार को घेरते हुए शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने और इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की।
संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में एक बार फिर पेपर लीक विवाद को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से जवाब मांगा और शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं पर चर्चा की मांग की।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। विपक्ष का कहना है कि जब तक इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
राज्यसभा में विपक्ष ने सरकार पर छात्रों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। विपक्षी नेताओं का कहना था कि देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षाएं दीं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं ने उनके विश्वास को गहरा आघात पहुंचाया है। ऐसे में सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
हंगामे के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। सरकार की ओर से कहा गया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए जा चुके हैं। केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नई तकनीकों का उपयोग कर रही है तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि विपक्ष सरकार के इन दावों से संतुष्ट नजर नहीं आया। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने कहा कि यदि सरकार के प्रयास प्रभावी होते तो लगातार विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने नहीं आतीं। विपक्ष ने पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा और जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई।
संसदीय कार्यवाही के दौरान बार-बार हो रहे शोर-शराबे के कारण सभापति को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा। लगातार हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। विपक्षी सांसदों ने तख्तियां दिखाते हुए सरकार के खिलाफ नारे लगाए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पेपर लीक का मुद्दा अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक विषय बन चुका है। विपक्ष इसे सरकार की प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़ रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और नए कानूनों के माध्यम से ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं होंगे। परीक्षा संचालन में डिजिटल सुरक्षा, डेटा एन्क्रिप्शन, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, प्रश्नपत्रों के सुरक्षित वितरण और पारदर्शी व्यवस्था को मजबूत करना भी आवश्यक है। इससे छात्रों का विश्वास दोबारा स्थापित किया जा सकता है।
देशभर के लाखों छात्र इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। उनका मानना है कि संसद में होने वाली चर्चा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहकर शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार की दिशा में आगे बढ़नी चाहिए। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
Correspondent – Shanwaz Khan


