बिहार विधानसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM अब 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रही है। मुरादाबाद में आयोजित यूथ वर्कर सम्मेलन में पार्टी के प्रवक्ता शादाब चौहान ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि AIMIM आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह बिहार में जनता ने नए विकल्प को समर्थन दिया, उसी प्रकार यूपी में भी सपा को “घर बैठाने” का काम होगा।
शादाब चौहान ने सम्मेलन में समाजवादी पार्टी को कठघरे में खड़ा करते हुए बीजेपी से “गुप्त समझौते” का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि अखिलेश यादव की भाभी अपर्णा यादव को भाजपा में किसने भेजा? उन्होंने कहा कि सपा नेताओं का भाजपा के साथ लंबे समय से तालमेल रहा है और जनता अब इस खेल को समझ चुकी है।
इसी क्रम में सपा विधायक और पूर्व मंत्री कमाल अख्तर पर भी चौहान ने बड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कमाल अख्तर भाजपा के नेताओं से नज़दीकियां बढ़ाकर अपने होटल कारोबार को फायदा पहुंचाते हैं और उल्टा AIMIM पर आरोप लगाते हैं कि पार्टी के टिकट भाजपा तय करती है। चौहान ने कहा, “जो खुद भाजपा की गोद में बैठे हैं, वे हमें क्या बताएंगे? बिहार में जिसने हमें कट्टरपंथी कहा, जनता ने उसे घर बैठा दिया। अब बारी यूपी की है।”
AIMIM प्रवक्ता ने मुस्लिम समाज की उपेक्षा का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि यूपी में निषाद और राजभर जैसी जातियों की संख्या मुसलमानों से कम होने के बावजूद उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी अधिक है, जबकि राज्य की लगभग 20% मुस्लिम आबादी आज भी खुद को पिछड़ा और प्रताड़ित महसूस करती है।
AIMIM ने यह भी शर्त रखी कि अगर अखिलेश यादव किसी मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे करने की घोषणा करते हैं, तो पार्टी उनके साथ खड़ी होने को तैयार है। चौहान ने कहा कि सपा मुस्लिम वोट बैंक का दावा तो करती है, लेकिन वास्तविक नेतृत्व देने से बचती है।
बिहार में AIMIM की पहली बड़ी राजनीतिक सफलता—5 सीटों पर जीत—के बाद पार्टी अब यूपी में मजबूत आधार बनाने की कोशिश में है। शादाब चौहान ने दावा किया कि मुरादाबाद की सभी पांच विधानसभा सीटों पर AIMIM जीत दर्ज करेगी और जिला पंचायत चुनावों में भी ऐतिहासिक प्रदर्शन करने के लिए पार्टी पूरी तरह तैयार है।
AIMIM के इन आक्रामक दावों और सपा पर हमलों ने 2027 के चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, साथ ही सपा के PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) समीकरण पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
Correspondent – Shanwaz khan


