उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान चर्चा में आ गए हैं। मेरठ में आयोजित एक जाट सम्मेलन के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणियों के बाद अब बालियान की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, इस सम्मेलन में भगवंत मान ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर तीखी आलोचना की थी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि सरकार जहां भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाने की बात करती है, वहीं नीतियों के कारण देश ‘विश्व चेला’ बनता जा रहा है। इस बयान के दौरान मंच पर संजीव बालियान भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने तत्काल कोई कड़ा विरोध नहीं किया।
इसी बात को लेकर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने नाराजगी जताई है। पार्टी ने मामले का संज्ञान लेते हुए संजीव बालियान को तलब किया है और उनसे इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व का मानना है कि ऐसे मंच पर पार्टी के वरिष्ठ नेता की मौजूदगी में प्रधानमंत्री पर की गई टिप्पणी का विरोध किया जाना चाहिए था।
हालांकि, संजीव बालियान ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने कार्यक्रम के दौरान दो बार मंच से इस तरह की राजनीतिक टिप्पणियों का विरोध किया था। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्यक्रम गैर-राजनीतिक था और इसमें इस तरह की बयानबाजी नहीं होनी चाहिए थी।
इस जाट सम्मेलन के दौरान केवल राजनीतिक बयान ही नहीं, बल्कि अन्य मुद्दों पर भी विवाद देखने को मिला। कार्यक्रम में जाट समाज से जुड़े एक शिलापट्ट को हटाने को लेकर भी लोगों ने विरोध जताया, जिससे माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बीच संजीव बालियान ने अपनी ही पार्टी के नेता संगीत सोम पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका अपमान किया गया है और इसका जवाब समय आने पर दिया जाएगा। उन्होंने अपने समर्थकों से भी कहा कि अगर वे इस बात को भूल जाएं, तो उन्हें जरूर याद दिलाया जाए।
इस मामले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में आगे क्या फैसला लेता है और संजीव बालियान का राजनीतिक भविष्य किस दिशा में जाता है।
Correspondent – Shanwaz Khan


