पवन खेड़ा विवाद में असम पुलिस ने दिल्ली में कार्रवाई की। आरोपों के बाद सियासत गरमाई, कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।
असम विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल तेजी से गर्म होता नजर आ रहा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बीच विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच असम पुलिस की कार्रवाई ने इस मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।
दरअसल, पवन खेड़ा ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास तीन पासपोर्ट होने का आरोप लगाया था। उन्होंने सवाल उठाया कि एक व्यक्ति को तीन पासपोर्ट रखने की क्या जरूरत है और क्या यह कानूनी रूप से सही है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई।
असम पुलिस की दिल्ली में कार्रवाई
इन आरोपों के बाद असम पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दिल्ली स्थित पवन खेड़ा के आवास पर छापेमारी की। हालांकि, पुलिस जब वहां पहुंची तो पवन खेड़ा मौजूद नहीं थे। इसके बावजूद पुलिस टीम ने घर से कुछ सामान जब्त किया और जांच को आगे बढ़ाने की बात कही।
पुलिस अधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पवन खेड़ा को कहीं से भी ढूंढ निकाला जाएगा और कानून अपना काम करेगा। इस बयान ने राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा गुवाहाटी से निकलकर अन्य स्थानों पर चले गए हैं और पुलिस उन्हें तलाश रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी कार्रवाई कानून के तहत हो रही है और इसमें कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है।

कांग्रेस का तीखा विरोध
असम पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया।
उन्होंने कहा कि जनहित में सवाल उठाने पर इस तरह की कार्रवाई लोकतंत्र के खिलाफ है। उनके अनुसार, राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए किया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह कार्रवाई दर्शाती है कि सरकार आलोचना से घबरा रही है और विपक्ष को डराने की कोशिश कर रही है।
आरोपों की जड़ क्या है?
5 अप्रैल को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने कई गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास तीन पासपोर्ट कैसे हो सकते हैं और क्या यह भारतीय कानून के तहत वैध है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अगर ऐसा है तो इसकी जांच होनी चाहिए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
राजनीतिक असर और आगे की स्थिति
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब असम में चुनावी सरगर्मी तेज हो रही है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। एक तरफ कांग्रेस इसे सरकार की दबाव की राजनीति बता रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई कह रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला किस दिशा में जाता है और क्या इससे चुनावी माहौल पर कोई बड़ा असर पड़ता है।
Correspondent – Shanwaz Khan


