Monday, March 2, 2026
Google search engine
HomeUncategorized“क्या केवल पराली ही जिम्मेदार? दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर भड़के CJI सूर्यकांत,...

“क्या केवल पराली ही जिम्मेदार? दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर भड़के CJI सूर्यकांत, CAQM को दोबारा समीक्षा का निर्देश”

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। सोमवार (1 दिसंबर 2025) को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने वायु गुणवत्ता से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि क्या प्रदूषण का एकमात्र कारण पराली जलाना ही है? अदालत ने कहा कि किसानों को पूरी तरह दोष देना आसान है, क्योंकि वे मुश्किल से ही अदालत में अपनी बात रख पाते हैं। सीजेआई ने कहा कि पहले भी पराली जलाई जाती थी, लेकिन तब दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) इतनी गंभीर श्रेणी में नहीं जाता था। कोरोना काल में भी पराली जलाई गई थी, लेकिन तब आसमान साफ दिखता था। इसलिए जरूरी है कि अन्य कारणों की भी गंभीरता से जांच हो।

यह टिप्पणी लंबे समय से लंबित एम.सी. मेहता केस की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक कई मुद्दे शामिल हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले पर अब नियमित रूप से निगरानी रखेगा।

“किसानों को दोष देना आसान, पराली अकेला कारण नहीं” – CJI सूर्यकांत

सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एश्वर्या भाटी ने बताया कि कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने प्रदूषण से निपटने के लिए संपूर्ण एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसमें पराली, वाहन प्रदूषण, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, सड़क की धूल और बायोमास जलाने से होने वाले प्रदूषण के समाधान शामिल हैं।

इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि वे पराली जलाने पर कोई विशेष टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन यह समझना जरूरी है कि केवल किसानों को दोषी ठहराने से समस्या का वास्तविक समाधान नहीं मिलेगा। उन्होंने दोहराया कि कोरोना काल जैसे समय में भी पराली जलाई गई थी, लेकिन तब प्रदूषण का स्तर इतना भयावह नहीं था। “नीला आसमान दिखता था, तारे दिखाई देते थे, ऐसा क्यों?”—सीजेआई ने सवाल किया।

प्रदूषण के अन्य कारणों की जांच पर जोर

सीजेआई ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर की आबादी, वाहनों की संख्या और शहरी ढांचे का वर्तमान दबाव भी बड़े कारक हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी शहर की संरचना यह सोचकर नहीं की गई थी कि एक ही परिवार में कई-कई गाड़ियां होंगी या इतनी बड़ी जनसंख्या एक साथ बसेगी।

उन्होंने अदालत में पूछा कि सरकार ने कौन से ठोस कदम उठाए हैं और उनका वास्तविक असर कितना हुआ है। अदालत ने कहा कि अब यह देखने का समय आ गया है कि क्या ये उपाय केवल “कागजों पर ही लिखने” तक सीमित हैं, या फिर क्रियान्वयन भी हो रहा है।

CAQM को एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने CAQM को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे, जिसमें निम्न बिंदु शामिल हों:

  • प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं
  • कौन से तात्कालिक (Short-term) और दीर्घकालिक (Long-term) उपाय लागू होने हैं
  • अब तक लागू किए गए कदमों का वास्तविक प्रभाव क्या रहा
  • प्रदूषण को नियंत्रित करने की समयसीमा और भविष्य की योजना क्या है

कोर्ट ने कहा कि केवल योजनाएं बनाना काफी नहीं है, बल्कि उनका प्रभाव जमीन पर दिखना चाहिए।

हर महीने दो बार होगी सुनवाई

सीजेआई सूर्यकांत ने आदेश दिया कि दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण पर अब नियमित रूप से हर महीने दो बार सुनवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल दिल्ली का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का है। इसलिए इस पर सख्त और सतत निगरानी जरूरी है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी और तब तक CAQM को अपनी विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती हवा और बढ़ते AQI के बीच सुप्रीम कोर्ट के ये निर्देश बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अब देखने की बात यह है कि संबंधित एजेंसियां और सरकारें इन टिप्पणियों और आदेशों को किस तरह अमल में लाती हैं।

Correspondent – Shanwaz Khan/Delhi/NCR

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments