देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पर यात्रियों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। 8 दिसंबर को लगातार सातवें दिन भी हालात में सुधार नहीं दिखा। देश के लगभग सभी बड़े हवाई अड्डों पर यात्रियों को फ्लाइट कैंसिलेशन, देरी, लगेज गुम होने और काउंटर पर लंबे इंतजार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बीते एक महीने में इंडिगो की 4,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, जिससे लाखों यात्री प्रभावित हुए हैं।
शनिवार को भी इंडिगो की 400 से ज्यादा उड़ानें रद्द रहीं। एयरलाइन ने यात्रियों से अनुरोध किया कि वे घर से निकलने से पहले अपनी फ्लाइट स्टेटस चेक कर लें। लेकिन समस्या केवल कैंसिलेशन तक सीमित नहीं है—जिनकी उड़ानें रद्द नहीं हुई हैं, वे भी भारी अव्यवस्था, लंबी लाइनों और स्टाफ की कमी की वजह से परेशान हैं।
एयरपोर्ट्स पर सूटकेस का पहाड़ जैसा ढेर लग चुका है। हजारों यात्रियों का सामान एयरलाइन के कब्जे में रह गया है। कई लोग अपनी मंजिल पहुंच गए, पर उनका लगेज अभी भी एयरपोर्ट पर पड़ा है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद एयरपोर्ट पर हालत सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। यात्रियों को बैग ढूंढने के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें अपना लगेज मिल ही नहीं रहा।
दिल्ली एयरपोर्ट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जहां हजारों बैग डिपार्चर और अराइवल एरिया में बेतरतीब ढंग से पड़े हैं। इंडिगो ने अब बैगेज लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी ने एक आउटसोर्स एजेंसी की मदद से यात्रियों के घर तक बैग पहुंचाने का निर्णय लिया है। प्रत्येक बैग के टैग से पहचान की जा रही है और यात्रियों को फोन कर उनका पता कन्फर्म किया जा रहा है।

रिफंड और रीशेड्यूलिंग को लेकर बवाल
इंडिगो काउंटरों पर यात्रियों ने नारेबाजी की। कई लोगों का कहना है कि कैंसिल फ्लाइट्स का पूरा रिफंड नहीं मिल रहा। वहीं रीशेड्यूल उड़ानों के साथ जुड़ी कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी कैंसिल बताई जा रही हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। कई लोगों की पढ़ाई, परीक्षा, नौकरी इंटरव्यू, शादी समारोह, बिजनेस मीटिंग और इलाज जैसी जरूरी योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
सरकार ने इंडिगो से जवाब तलब किया है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इंडिगो ने जवाब तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा, जिसे मंजूर करते हुए DGCA ने शाम 6 बजे तक का समय दिया है। एयरलाइन को बताना है कि कोर्ट और DGCA के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद ऐसी अव्यवस्था कैसे हो गई।

समस्या की जड़—DGCA के नए नियम और इंडिगो की तैयारी की कमी
इंडिगो का संकट नवंबर से ही शुरू हो गया था, जब DGCA ने नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों का दूसरा चरण लागू किया। इन नियमों के अनुसार पायलटों को अधिक आराम देने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम के घंटे सीमित कर दिए गए।
नए मानकों में शामिल हैं—
- पायलट को हफ्ते में 36 घंटे की जगह 48 घंटे अनिवार्य आराम
- लंबी उड़ानों के बाद 24 घंटे का अनिवार्य रेस्ट
- अधिकतम 2 नाइट लैंडिंग की सीमा
- रात 12 से सुबह 6 बजे तक नाइट लैंडिंग का नया समय
- उड़ान के पहले और बाद में 1 घंटे से ज्यादा काम नहीं
- 28 दिनों में अधिकतम 100 घंटे उड़ान की सीमा
इन नियमों का मकसद सुरक्षा स्तर बढ़ाना और पायलट थकान से जुड़े जोखिमों को कम करना है। लेकिन इंडिगो इन नियमों का पालन करने के लिए अपने पायलट रोस्टर को समय पर तैयार नहीं कर पाई। इसका नतीजा यह हुआ कि स्टाफ की भारी कमी पड़ गई और उड़ान संचालन बुरी तरह प्रभावित होने लगे।
पायलट यूनियन ने पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी कि इंडिगो नियमों का पालन नहीं कर रही और पायलटों को पर्याप्त आराम नहीं दिया जा रहा। कोर्ट के आदेश के बाद DGCA ने कड़े नियम लागू किए, लेकिन इंडिगो ने न तो खुद को तैयार किया, न ही समय पर सरकार को जानकारी दी कि नियम लागू होने से संचालन प्रभावित होगा।
इंडिगो की इस “अक्षमता” और “अड़ियल रवैये” का खामियाजा अब आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। DGCA ने परिस्थितियों को देखते हुए नियम लागू करने की अंतिम तिथि 10 फरवरी तक बढ़ा दी, लेकिन उससे पहले ही इंडिगो की उड़ानें धड़ाधड़ प्रभावित होने लगीं।
यात्रियों की उम्मीदें—क्या हालात सुधरेंगे?
इंडिगो की ओर से दावा किया गया है कि 8 दिसंबर के बाद स्थिति सामान्य होने लगेगी। लेकिन आज भी बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने से यह साफ है कि संकट पूरी तरह खत्म होने में समय लगेगा।
फिलहाल सरकार के दबाव, DGCA की जांच और सोशल मीडिया पर बढ़ते आक्रोश ने एयरलाइन को बैगेज लौटाने और रिफंड प्रोसेस तेज करने पर मजबूर कर दिया है। लेकिन लाखों यात्रियों की परेशानी और एयरपोर्ट्स पर फैली अव्यवस्था ने इंडिगो की छवि को गंभीर झटका दिया है।
कुल मिलाकर, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इस समय अपने सबसे बड़े ऑपरेशनल संकट से गुजर रही है और इसका सीधा नुकसान आम यात्रियों को उठाना पड़ रहा है।
Correspondent – Shanwaz khan


