असम विधानसभा चुनाव के बीच हिमंत बिस्वा सरमा विवाद पर राजनीति गरमाई। प्रियंका चतुर्वेदी ने पारदर्शिता की मांग की, जानिए पूरा मामला।
असम विधानसभा चुनाव के माहौल में हिमंत बिस्वा सरमा विवाद के चलते राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच गई है। भारतीय राजनीति में एक नया विवाद उस समय खड़ा हो गया जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों के सामने आते ही विभिन्न दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी तेजी से सामने आने लगीं।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया कि हिमंत बिस्वा सरमा विवाद से जुड़े कुछ दस्तावेज संदिग्ध हैं। उन्होंने कथित तौर पर अलग-अलग देशों के पासपोर्ट और वित्तीय आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए। खेड़ा ने आरोप लगाया कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। हालांकि, इन दावों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हो पाई है।
इस पूरे हिमंत बिस्वा सरमा विवाद में शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और इन पर स्पष्टता जरूरी है। उनका कहना है कि यदि ये आरोप गलत हैं, तो मुख्यमंत्री को स्वयं सामने आकर तथ्यों के साथ अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है और जनता को सच जानने का अधिकार है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी मुद्दा उठाया कि हाल ही में हिमंत बिस्वा सरमा ने भी कांग्रेस नेता गौरव गोगोई को लेकर व्यक्तिगत आरोप लगाए थे। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला और तेज हो गया है, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गरमाता जा रहा है और हिमंत बिस्वा सरमा विवाद और गहरा होता दिख रहा है।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस हिमंत बिस्वा सरमा विवाद से जुड़े सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज पूरी तरह से फर्जी हैं। उनके अनुसार, जांच में यह पाया गया है कि दस्तावेजों में कई त्रुटियां हैं, जैसे जन्मस्थान और नाम की स्पेलिंग में गड़बड़ी। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत सरकार के माध्यम से इन दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि की गई है और वे पूरी तरह नकली पाए गए हैं।
सीएम सरमा ने आगे कहा कि इस मामले में पवन खेड़ा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक आपराधिक साजिश का हिस्सा है और इसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी समय में इस तरह के आरोप राजनीतिक रणनीति का हिस्सा होते हैं, लेकिन हिमंत बिस्वा सरमा विवाद का असर मतदाताओं की सोच पर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सभी पक्ष तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखें और चुनावी प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखें।
Correspondent – Shanwaz Khan


