उत्तर प्रदेश में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं. विपक्षी दलों के आरोपों के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने एबीपी न्यूज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत में इस पूरी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने साफ कहा कि SIR का उद्देश्य मतदाताओं के नाम काटना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक सटीक, अपडेट और पारदर्शी बनाना है.
नवदीप रिणवा ने बताया कि SIR का पहला चरण पूरा हो चुका है और 6 जनवरी को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई है. अब कोई भी मतदाता निर्वाचन आयोग की वेबसाइट या अपने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर आसानी से अपना नाम जांच सकता है. अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को गांव और शहर दोनों स्तर पर प्रकाशित की जाएगी.
गलती सुधारने का पूरा मौका
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि अगर किसी मतदाता के नाम, उम्र, पते या अन्य विवरण में कोई गलती है तो घबराने की जरूरत नहीं है. 6 जनवरी से 6 फरवरी के बीच निर्धारित फॉर्म भरकर संशोधन कराया जा सकता है. यह प्रक्रिया BLO, तहसील कार्यालय और ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर शिकायत का समयबद्ध निस्तारण किया जाएगा.
दो जगह नाम होना गैरकानूनी
नवदीप रिणवा ने बताया कि कई लोग काम के कारण शहरों में रहते हैं, लेकिन उनका नाम गांव की मतदाता सूची में भी दर्ज रहता है. उन्होंने कहा कि एक ही व्यक्ति का नाम दो जगह होना गलत और गैरकानूनी है. SIR के दौरान लोगों ने खुद जागरूक होकर एक जगह से नाम कटवाकर दूसरी जगह सही सूची में दर्ज कराया है. उन्होंने कहा कि इससे मतदान प्रतिशत पर नहीं, बल्कि मतदाता की जागरूकता पर असर पड़ता है.
नाम नहीं दिखे तो क्या करें?
उन्होंने बताया कि यदि किसी मतदाता ने SIR फॉर्म भरा है, लेकिन फिर भी उसका नाम सूची में नहीं दिख रहा, तो वह दोबारा BLO या निर्वाचन कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकता है. पात्र पाए जाने पर उसका नाम अंतिम सूची में जोड़ दिया जाएगा. संशोधन या नए नाम जुड़ने के बाद नया वोटर आईडी कार्ड भी डाक या ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा.
चुनाव आयोग पर दबाव का आरोप गलत
समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए नवदीप रिणवा ने कहा कि चुनाव आयोग पूरी तरह निष्पक्ष संस्था है और किसी भी राजनीतिक दल के दबाव में काम नहीं करता. उन्होंने स्वीकार किया कि मानवीय या तकनीकी स्तर पर कभी-कभी गलती हो सकती है, लेकिन उसे सुधारने के लिए पूरा समय और व्यवस्था दी गई है.
उन्होंने बताया कि करीब 2 करोड़ 80 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, लेकिन इनमें अधिकतर वे लोग हैं जो पते पर नहीं मिले, स्थान बदल चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिनका नाम दो जगह दर्ज था. उन्होंने दोहराया कि किसी भी सही और पात्र मतदाता का नाम अगर गलती से कट गया है, तो उसे फिर से जोड़ने का पूरा अवसर दिया जा रहा है.
लोकतंत्र को मजबूत करने की पहल
नवदीप रिणवा ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मतदाता सूची को अपडेट रखना एक सतत प्रक्रिया है. SIR इसी दिशा में एक अहम कदम है, ताकि हर नागरिक का वोट सुरक्षित रहे और लोकतंत्र की नींव और मजबूत हो सके. उन्होंने जनता से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अपनी जानकारी स्वयं जांचकर सही कराएं.
Correspondent – Shanwaz khan


