Monday, March 2, 2026
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नोएडा–गाजियाबाद में वोटर लिस्ट अपडेट में लापरवाही, 57 बीएलओ पर दर्ज होगी एफआईआर

नोएडा और गाजियाबाद में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आई है। अभियान शुरू हुए 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन कई बूथ लेवल अधिकारी (BLO) अपने दायित्वों का निर्वहन करने में विफल रहे हैं। इसी कारण दोनों जिलों में कुल 57 बीएलओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने इसे चुनाव प्रक्रिया में बाधा और सरकारी कर्तव्य की अनदेखी मानते हुए कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।

नोएडा में 19 बीएलओ पर कार्रवाई तय
नोएडा में जिलाधिकारी मेधा रूपम के निर्देश पर 19 बीएलओ को कार्रवाई के दायरे में लाया गया है। 7 नवंबर को 140 बीएलओ को ढिलाई के लिए चेतावनी दी गई थी, जिसके बाद अधिकांश अधिकारियों ने काम शुरू कर दिया। लेकिन जेवर के 7, सदर के 3 और दादरी के 9 बीएलओ ने अभी तक काम में रुचि नहीं दिखाई। हालांकि इन अधिकारियों ने लिखित स्पष्टीकरण भी जमा किया, लेकिन लगातार अनुपस्थित रहने के कारण अब उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश की स्वीकृति के बाद दी जाएगी।

गाजियाबाद में 38 बीएलओ के खिलाफ शिकायत
गाजियाबाद में भी स्थिति चिंताजनक है। यहां कुल 38 बीएलओ ने फॉर्म वितरण और संग्रहण जैसे महत्वपूर्ण कामों में कोई सक्रियता नहीं दिखाई। पिछले सप्ताह 25 बीएलओ के खिलाफ एफआईआर का प्रस्ताव भेजा गया था, जबकि बुधवार को 13 बीएलओ के नाम और जोड़े गए। एडीएम प्रशासन सौरभ भट्ट ने बताया कि सिहनी गेट थाने को शिकायत भेज दी गई है और जल्द ही एफआईआर दर्ज की जाएगी।

लापरवाही पर सजा का प्रावधान
बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 32 के तहत की जा रही है। यह धारा उन सरकारी अधिकारियों पर लागू होती है जो मतदाता सूची के संशोधन या तैयारी में बिना उचित कारण कर्तव्य का पालन नहीं करते। इसके तहत दोषी पाए जाने पर 3 महीने से 2 वर्ष तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। एफआईआर दर्ज करने से पहले निर्वाचन आयोग या राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की मंजूरी अनिवार्य है।

SIR अभियान की अहमियत
मतदाता सूची को 100% सटीक और अद्यतन करना SIR अभियान का मुख्य उद्देश्य है। बीएलओ इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे घर–घर जाकर फॉर्म भरवाने, नए मतदाताओं को जोड़ने और पुराने नाम सुधारने का कार्य करते हैं। अधिकारियों की लापरवाही सीधे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, इसलिए प्रशासन इस बार किसी भी प्रकार की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं कर रहा है।

Correspondent – Shanwaz Khan

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