Friday, March 6, 2026
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बिहार चुनाव: सीट बंटवारे पर सुलह के प्रयास तेज, गहलोत बने संकटमोचक

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर जारी अनबन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। कांग्रेस, आरजेडी, वाम दलों और वीआईपी की साझेदारी वाले इस गठबंधन में करीब एक दर्जन सीटों पर सहयोगी दलों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। इसी पेंच को सुलझाने के लिए अब कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत को मैदान में उतारा है।

कांग्रेस की ओर से बिहार चुनाव के वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाए गए गहलोत बुधवार सुबह पटना पहुंचेंगे। सूत्रों के अनुसार, उनकी तेजस्वी यादव से मुलाकात तय है, जिसमें उन सीटों पर समाधान खोजने की कोशिश होगी जहां “फ्रेंडली फाइट” की स्थिति बन चुकी है। कांग्रेस को भरोसा है कि गहलोत का अनुभव इस तनाव को कम करने में कारगर साबित होगा।

आरजेडी और कांग्रेस के अलावा, इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दल—सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई (माले) और वीआईपी—के नेताओं की भी सामूहिक बैठक होने की संभावना है। इन बैठकों के जरिए सीटों पर समझौते की रूपरेखा तैयार करने का प्रयास होगा ताकि चुनाव से पहले एकता का संदेश दिया जा सके।

सूत्रों के मुताबिक, अगर बातचीत सफल रहती है तो 23 अक्टूबर को तेजस्वी यादव की अगुवाई में गठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हो सकती है। इसमें गठबंधन की एकजुटता का प्रदर्शन करने के साथ तेजस्वी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की संभावना भी जताई जा रही है। उसी दिन दूसरे चरण के लिए नाम वापस लेने की आखिरी तारीख है, इसलिए चर्चाओं में तेजी आ गई है।

फिलहाल करीब छह सीटों पर फ्रेंडली फाइट की स्थिति बनी हुई है, जिनमें से चार पर कांग्रेस और आरजेडी सीधे मुकाबले में हैं। पहले चरण में एक सीट पर कांग्रेस पहले ही अपना उम्मीदवार वापस ले चुकी है। हालांकि बेगूसराय की बछवाड़ा सीट जैसी कुछ जगहों पर सहमति बन पाना अब भी कठिन माना जा रहा है, क्योंकि वहां कांग्रेस और सीपीआई दोनों अपने प्रत्याशी हटाने को तैयार नहीं हैं।

इन मतभेदों के बावजूद, इंडिया गठबंधन के नेता अंतिम समय में तालमेल स्थापित करने के प्रयास में जुटे हैं ताकि मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति कम हो और एनडीए को इसका लाभ न मिल सके। दूसरी ओर, एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या महागठबंधन इन मतभेदों को सुलझा पाकर एकजुट मोर्चे के रूप में उभर पाता है या नहीं।

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