उमा भारती ने टीकमगढ़ में अतिक्रमण हटाने के विरोध में ठेला लगाकर पोहा-जलेबी बेची। प्रशासन पर गरीबों की रोजी छीनने का आरोप लगाया।
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में प्रशासन द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। इस मुद्दे पर राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
दरअसल, सिविल लाइन रोड पर प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई रेहड़ी-पटरी वालों की दुकानों को हटाया। इस कार्रवाई के विरोध में उमा भारती खुद सड़क पर उतरीं और अपने घर के सामने ठेला लगाकर पोहा-जलेबी बेचने लगीं।
उनका यह अनोखा विरोध न केवल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया, बल्कि पूरे प्रदेश में राजनीतिक बहस भी छेड़ गया।
अतिक्रमण हटाओ अभियान क्या था?
टीकमगढ़ के अस्पताल चौराहे से ईदगाह तक प्रशासन ने अभियान चलाकर करीब 25 अवैध दुकानों को हटाया। यह कार्रवाई एसडीएम संस्कृति मुदित लिटोरिया और तहसीलदार सतेंद्र सिंह गुर्जर की मौजूदगी में की गई।
प्रशासन के अनुसार, सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में इस मार्ग पर बढ़ते ट्रैफिक और अव्यवस्था को लेकर चिंता जताई गई थी। फुटपाथों पर दुकानों के कारण एम्बुलेंस और मरीजों को आने-जाने में कठिनाई हो रही थी।
कई बार चेतावनी देने के बावजूद जब अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तब यह कदम उठाया गया।
उमा भारती का विरोध
जैसे ही उमा भारती को इस कार्रवाई की जानकारी मिली, उन्होंने इसका विरोध करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने गरीबों की रोजी-रोटी छीन ली, जबकि संपन्न लोगों के अवैध निर्माण पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उमा भारती ने कहा, “अगर प्रशासन को अतिक्रमण हटाना था तो पहले इन लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। बिना विकल्प दिए उनका रोजगार खत्म करना अन्याय है।”
इसी विरोध के तहत उन्होंने खुद ठेला लगाकर पोहा-जलेबी बेचना शुरू किया और प्रशासन को चुनौती दी कि अगर हिम्मत है तो उनकी रेहड़ी हटाकर दिखाए।
जनता का मिला समर्थन
उमा भारती के इस अनोखे विरोध को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे। कई लोग उनके हाथों से पोहा-जलेबी खाते नजर आए और उनके समर्थन में खड़े दिखे।
यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया, जहां लोग उनके इस कदम की सराहना करते नजर आए।
प्रशासन बनाम राजनीति
इस मुद्दे पर प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई है और इसका उद्देश्य केवल यातायात व्यवस्था को सुधारना था।
वहीं उमा भारती का आरोप है कि कार्रवाई में भेदभाव किया गया है और केवल गरीबों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में किसी भी सुधार की शुरुआत पहले सक्षम लोगों से होनी चाहिए, न कि गरीबों से।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
उमा भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भी इस मुद्दे को उठाया और कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्थानीय निकाय भाजपा के नियंत्रण में नहीं है, अन्यथा यह कार्रवाई इस तरह नहीं होती।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमीर लोगों के घर और रेस्तरां नियमों का उल्लंघन करते हुए भी सुरक्षित हैं, जबकि गरीबों के छोटे-छोटे ठेले हटा दिए गए।
निष्कर्ष
टीकमगढ़ में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। जहां प्रशासन इसे कानून व्यवस्था का हिस्सा बता रहा है, वहीं उमा भारती इसे गरीबों के खिलाफ अन्याय करार दे रही हैं।
उनका सड़क पर उतरकर विरोध करना यह दर्शाता है कि यह मामला सिर्फ अतिक्रमण का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता का भी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।
Correspondent – Shanwaz Khan


