तेल और गैस की वैश्विक कमी के बीच ईरान की ओर से एक अहम और राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने घोषणा की है कि उसने भारत सहित अपने पांच मित्र देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और ईरान, इजरायल तथा अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष को लगभग चार हफ्ते हो चुके हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी मीडिया को दिए इंटरव्यू में बताया कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को विशेष अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि इन देशों के साथ ईरान के दोस्ताना संबंध हैं और उनकी जरूरतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। मुंबई स्थित ईरानी महावाणिज्य दूतावास ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस फैसले की पुष्टि की।
अराघची के अनुसार, कई देशों के जहाज मालिकों ने ईरान से संपर्क कर सुरक्षित मार्ग की मांग की थी। इसके बाद ईरान ने अपने सशस्त्र बलों के माध्यम से इन मित्र देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के दो जहाज हाल ही में इस मार्ग से सुरक्षित रूप से गुजर चुके हैं और आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी, यहां तक कि युद्ध समाप्त होने के बाद भी।
यह फैसला संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की अपील के बाद लिया गया है। गुटेरेस ने चेतावनी दी थी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है तो इसका असर वैश्विक स्तर पर तेल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति पर पड़ेगा। खासकर कृषि सीजन के दौरान इससे दुनिया भर के आम लोगों को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने सभी पक्षों से तुरंत संघर्ष खत्म करने की अपील भी की थी।
हालांकि ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका, इजरायल और उन खाड़ी देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी जो इस संघर्ष में शामिल हैं। अराघची ने कहा कि वर्तमान स्थिति युद्ध जैसी है और इस क्षेत्र को युद्ध क्षेत्र माना जा रहा है। ऐसे में दुश्मन देशों या उनके सहयोगियों को किसी भी तरह की छूट देना संभव नहीं है।
भारत के लिए यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य का आंशिक रूप से खुलना भारत के लिए बड़ी राहत है। इससे तेल, गैस और उर्वरकों की सप्लाई में बाधा कम होगी और घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल तथा खाद की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो भी गैर-दुश्मन देश इस मार्ग का उपयोग करना चाहते हैं, उन्हें पहले ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय करना होगा। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की गतिविधि में शामिल नहीं हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका की ओर से शांति प्रयास भी जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बहु-बिंदु शांति प्रस्ताव भेजा है और फिलहाल सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है। हालांकि ईरान ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिया है और अपने सख्त रुख पर कायम है।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में इसका आंशिक रूप से खुलना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए राहत भरी खबर है, लेकिन क्षेत्र की स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।
Correspondent – Shanwaz Khan


