मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और परमाणु ठिकानों पर हमलों की खबरों ने एक बार फिर पूरी दुनिया को परमाणु युद्ध के खतरे की याद दिला दी है। ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष, यरूशलेम में मिसाइल गिरने और ईरान के नतांज परमाणु केंद्र पर हमले के दावों ने वैश्विक चिंता को और गहरा कर दिया है। ऐसे हालात में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि दुनिया के पास मौजूद परमाणु हथियार आखिर कितनी तबाही मचा सकते हैं और क्या ये पूरी पृथ्वी को कई बार खत्म कर सकते हैं।
दुनिया में इस समय कुल 9 देश परमाणु हथियारों से लैस माने जाते हैं। इनमें रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, भारत, पाकिस्तान, इजरायल और उत्तर कोरिया शामिल हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, इन देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 12 हजार से अधिक परमाणु हथियार मौजूद हैं। इनमें रूस के पास सबसे ज्यादा करीब 5,500 और अमेरिका के पास लगभग 5,000 परमाणु हथियार बताए जाते हैं। चीन तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रहा है और उसके पास करीब 500 हथियार हैं, जबकि फ्रांस और ब्रिटेन के पास क्रमशः करीब 290 और 225 परमाणु बम हैं। दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान के पास भी सैकड़ों की संख्या में परमाणु हथियार मौजूद हैं, जबकि इजरायल और उत्तर कोरिया के पास अपेक्षाकृत कम लेकिन बेहद खतरनाक हथियार हैं।
यह आंकड़े सुनने में ही डरावने लगते हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इन हथियारों से कितनी तबाही संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्यम क्षमता (30-40 किलोटन) के लगभग 500 परमाणु बमों का इस्तेमाल किया जाए, तो यह पूरी दुनिया की वर्तमान आबादी को खत्म करने के लिए पर्याप्त हो सकता है। यानी मौजूदा परमाणु हथियारों का छोटा सा हिस्सा भी मानव सभ्यता को समाप्त करने की क्षमता रखता है।
हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पूरी पृथ्वी को भौतिक रूप से नष्ट करना इतना आसान नहीं है। पृथ्वी का आकार और संरचना इतनी विशाल है कि उसे पूरी तरह मिटाने के लिए लाखों की संख्या में परमाणु बमों की जरूरत पड़ेगी। अनुमान के मुताबिक, पृथ्वी की पूरी सतह को पूरी तरह नष्ट करने के लिए एक लाख से अधिक परमाणु बमों की आवश्यकता होगी। इस लिहाज से वर्तमान हथियार भंडार मानव जीवन को तो खत्म कर सकता है, लेकिन ग्रह को पूरी तरह मिटा देना संभव नहीं है।
परमाणु हथियारों की दौड़ यहीं खत्म नहीं होती। कई देश ऐसे भी हैं जो आधिकारिक रूप से परमाणु शक्ति नहीं हैं, लेकिन इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ईरान का नाम इस सूची में सबसे प्रमुख रूप से लिया जाता है। इसके अलावा अर्जेंटीना, ब्राजील, मिस्र, ताइवान और कुछ अन्य देशों के बारे में भी समय-समय पर ऐसी आशंकाएं जताई जाती रही हैं। जापान जैसे देशों के पास तकनीकी क्षमता तो है, लेकिन वे अभी परमाणु हथियार बनाने से दूर हैं।
परमाणु युद्ध के खतरे को और भयावह बनाता है रूस का ‘डेड हैंड’ सिस्टम। यह एक स्वचालित प्रणाली है जिसे शीत युद्ध के दौर में विकसित किया गया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अगर किसी हमले में रूस का पूरा नेतृत्व खत्म हो जाए, तब भी यह सिस्टम स्वतः सक्रिय होकर दुश्मन देशों पर परमाणु मिसाइलें दाग सके। यह तकनीक आज भी रहस्य और भय का विषय बनी हुई है, क्योंकि इससे यह साफ होता है कि परमाणु युद्ध में कोई भी पक्ष पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह सकता।
परमाणु हथियारों का असर सिर्फ विस्फोट तक सीमित नहीं रहता। इसके बाद जो स्थिति पैदा होती है, वह और भी विनाशकारी होती है। परमाणु विस्फोट से उठने वाला धुआं और धूल वातावरण में फैलकर सूरज की रोशनी को रोक सकता है। इस स्थिति को “न्यूक्लियर विंटर” कहा जाता है, जिसमें धरती का तापमान अचानक गिर जाता है। खेती पूरी तरह ठप हो जाती है, खाद्य संकट पैदा होता है और बड़े पैमाने पर भुखमरी फैल सकती है।
इतिहास में हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बमों ने जो तबाही मचाई थी, वह आज भी दुनिया के लिए चेतावनी है। लेकिन आधुनिक परमाणु हथियार उनसे कई गुना अधिक शक्तिशाली हैं। ऐसे में यदि आज परमाणु युद्ध होता है, तो उसका असर कहीं ज्यादा व्यापक और घातक होगा।
वर्तमान वैश्विक हालात को देखते हुए यह साफ है कि परमाणु हथियार केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा भी हैं। दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इन हथियारों के इस्तेमाल को हर हाल में रोका जाए और कूटनीति के जरिए तनाव को कम किया जाए।
अंततः, यह कहना गलत नहीं होगा कि आज की दुनिया तकनीकी रूप से जितनी उन्नत हो चुकी है, उतनी ही संवेदनशील और असुरक्षित भी बन गई है। परमाणु हथियारों का यह जखीरा हमें बार-बार यह याद दिलाता है कि एक छोटी सी गलती पूरी मानव सभ्यता को खत्म कर सकती है।
Correspondent – Shanwaz Khan


