मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां संघर्ष का केंद्र केवल सैन्य शक्ति या मिसाइलें नहीं, बल्कि बिजली जैसी बुनियादी जरूरत बनती जा रही है। ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उसके बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया गया, तो वह भी क्षेत्र के उन सभी बिजली ढांचों पर हमला करेगा जो अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ऊर्जा प्रदान करते हैं।
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए 48 घंटे की समयसीमा दी है। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी पकड़ कम नहीं करता, तो उसके ऊर्जा ढांचे पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। इस समयसीमा के खत्म होने से पहले ही पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता और तनाव का माहौल बन गया है।
ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यदि उसके बिजली संयंत्रों को नुकसान पहुंचाया गया, तो वह भी उसी स्तर पर जवाब देगा। ईरान ने स्पष्ट किया कि वह न केवल उन देशों के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगा जो अमेरिकी ठिकानों को बिजली देते हैं, बल्कि उन आर्थिक और औद्योगिक ढांचों पर भी हमला करेगा, जिनमें अमेरिका की भागीदारी है। इस चेतावनी ने खाड़ी देशों की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति बेहद संवेदनशील है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में बिजली संयंत्रों से ही डीसैलिनेशन प्लांट जुड़े होते हैं, जो समुद्री पानी को पीने योग्य बनाते हैं। ऐसे में यदि बिजली आपूर्ति बाधित होती है, तो यह केवल ऊर्जा संकट नहीं बल्कि गंभीर जल संकट भी पैदा कर सकता है। इससे लाखों लोगों की दैनिक जरूरतें प्रभावित हो सकती हैं।
ईरान ने अपने बयान में यह भी कहा कि उसने अब तक कई हमलों का जवाब नहीं दिया है, लेकिन यदि बिजली जैसे महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाया गया, तो वह चुप नहीं बैठेगा। यह संकेत देता है कि अब तेहरान “जैसे को तैसा” की नीति अपनाने के लिए तैयार है, जिससे हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं।
इस बढ़ते तनाव का असर केवल क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं है। वैश्विक ऊर्जा बाजार भी इससे प्रभावित हो रहा है। तेल और गैस की कीमतों में पहले ही उछाल देखा जा रहा है, और अगर बिजली ढांचे पर हमले शुरू होते हैं, तो यह संकट और गहरा सकता है। इसका सीधा असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं और आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ घंटे बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते, तो यह टकराव एक बड़े ऊर्जा और मानवीय संकट का रूप ले सकता है। मध्य पूर्व इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां एक छोटी सी चूक पूरे क्षेत्र को गंभीर संकट में डाल सकती है।
दुनिया भर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या हालात बातचीत से संभलेंगे या फिर बिजली को लेकर शुरू होने वाला यह नया संघर्ष पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेगा।
Correspondent – Shanwaz Khan


