मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच लोगों की दिलचस्पी इस क्षेत्र के सामाजिक और धार्मिक पहलुओं को समझने में भी बढ़ी है। इसी कड़ी में एक सवाल अक्सर उठता है कि क्या ईरान जैसे इस्लामिक देश में हिंदू समुदाय मौजूद है और वहां मंदिर भी हैं या नहीं। इसका जवाब है—हाँ, लेकिन संख्या बहुत सीमित है और इसका इतिहास काफी रोचक है।
ईरान में हिंदू आबादी बहुत कम है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार यहां लगभग 20,000 से 40,000 हिंदू रहते हैं, जो देश की कुल आबादी का बेहद छोटा हिस्सा है। इसके अलावा भारत से जुड़े करीब 9,000 नागरिक—जिनमें छात्र, व्यापारी और कामगार शामिल हैं—भी ईरान में निवास करते हैं। ये लोग मुख्य रूप से व्यापार, शिक्षा और छोटे व्यवसायों से जुड़े हुए हैं।
ईरान में हिंदू विरासत का सबसे प्रमुख उदाहरण बंदर अब्बास में स्थित विष्णु मंदिर है, जिसे स्थानीय भाषा में “इबादतगाह-ए-हिंदू” कहा जाता है। इस मंदिर का निर्माण 1892 में गुजरात के हिंदू व्यापारियों ने करवाया था, जो उस समय व्यापार के लिए ईरान के तटीय इलाकों में बसे थे। इस मंदिर की वास्तुकला बेहद खास है, जिसमें भारतीय और ईरानी शैलियों का सुंदर संगम देखने को मिलता है। हालांकि आज यहां नियमित पूजा-पाठ नहीं होता, लेकिन इसे एक ऐतिहासिक धरोहर और संग्रहालय के रूप में संरक्षित किया गया है।
चाबहार बंदरगाह के पास भी एक प्राचीन हिंदू मंदिर होने की जानकारी मिलती है। माना जाता है कि इसे भी भारतीय व्यापारियों ने बनवाया था। ये मंदिर उस दौर के गवाह हैं जब भारत और ईरान के बीच समुद्री व्यापार काफी सक्रिय था। उस समय ये धार्मिक स्थल न केवल पूजा के लिए बल्कि भारतीय समुदाय के सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी काम करते थे।
इसके अलावा तेहरान, जहेदान और इस्फहान जैसे शहरों में छोटे स्तर पर हिंदू पूजा स्थल मौजूद होने की बात भी सामने आती है। यहां रहने वाले हिंदू समुदाय के लोग समय-समय पर इकट्ठा होकर दीवाली जैसे त्योहार मनाते हैं और अपनी धार्मिक परंपराओं को जीवित रखते हैं।
हालांकि ईरान में हिंदुओं की संख्या सीमित है, लेकिन उनका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक योगदान महत्वपूर्ण रहा है। यहां मौजूद मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि वे भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने संबंधों के प्रतीक भी हैं।
आज ये स्थल इस बात का प्रमाण हैं कि अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों के लोग समय-समय पर एक-दूसरे के साथ मिलकर रहे हैं और अपनी पहचान को बनाए रखा है। ईरान में हिंदू समुदाय भले ही छोटा हो, लेकिन उसकी विरासत और इतिहास आज भी जीवंत है और दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करता है।
Correspondent – Shanwaz Khan


