Tuesday, March 31, 2026
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मिडिल ईस्ट संकट पर संसद में चर्चा की मांग, AAP सांसद संजय सिंह ने उठाया मुद्दा

आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हालिया घटनाओं को लेकर संसद में चर्चा कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगातार बिगड़ती स्थिति का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है और भारत के हितों को देखते हुए इस विषय पर संसद में गंभीर चर्चा होना जरूरी है।

संजय सिंह ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और बढ़ते सैन्य तनाव से वैश्विक स्तर पर अस्थिरता पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं और वहां की स्थिति खराब होने पर उनकी सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा बन जाती है। ऐसे में सरकार को संसद में इस विषय पर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय हालात से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में चर्चा होना लोकतंत्र के लिए जरूरी है। संजय सिंह ने मांग की कि सरकार संसद में बयान दे और बताए कि मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात पर भारत का क्या रुख है और वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

AAP सांसद ने यह भी कहा कि भारत का मिडिल ईस्ट के कई देशों के साथ व्यापारिक, कूटनीतिक और रणनीतिक संबंध हैं। तेल और गैस की आपूर्ति के लिहाज से भी यह क्षेत्र भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए वहां की किसी भी बड़ी घटना का असर भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।

उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया कि यदि जरूरत हो तो भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए जाएं। संजय सिंह ने कहा कि कई बार संकट की स्थिति में वहां काम कर रहे भारतीयों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, इसलिए सरकार को पहले से ही एक स्पष्ट योजना बनाकर रखनी चाहिए।

विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगे हैं। उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं और भारत जैसे बड़े देश के लिए यह जरूरी है कि वह अपनी रणनीति स्पष्ट रखे। संसद में चर्चा होने से सरकार की नीति और तैयारी के बारे में जानकारी सामने आ सकेगी।

हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस मांग पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक संकट से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा होने से सरकार और विपक्ष दोनों अपनी बात रख सकते हैं और इससे देश की विदेश नीति पर व्यापक दृष्टिकोण सामने आता है।

फिलहाल मिडिल ईस्ट की स्थिति को लेकर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। ऐसे में भारत सरकार भी घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाने की तैयारी कर रही है।

Correspondent – Shanwaz Khan

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