Monday, March 2, 2026
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रूसी तेल पर अमेरिकी दबाव के बीच भारत की ऊर्जा रणनीति पर चर्चा तेज, राजदूत सर्जियो गोर का बड़ा बयान

वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत की तेल खरीद नीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने संकेत दिया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तेल आयात के विकल्पों में विविधता लाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत वेनेजुएला से तेल खरीदने को लेकर बातचीत कर रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

दरअसल, भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते सरकार लंबे समय से सस्ते और स्थिर आपूर्ति स्रोतों की तलाश में है। इसी संदर्भ में अमेरिकी राजदूत का बयान अहम माना जा रहा है, क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से रूसी तेल की खरीद को लेकर पश्चिमी देशों की नजर भारत पर बनी हुई है। गोर ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि कोई भी देश रूसी तेल खरीदे और इस मुद्दे पर अमेरिकी नेतृत्व की नीति पहले से ही स्पष्ट रही है।

‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान मीडिया से बातचीत में सर्जियो गोर ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तेल खरीद के स्रोतों में विविधता लाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत वेनेजुएला समेत अन्य देशों से तेल आयात के विकल्पों पर विचार कर रहा है, ताकि आपूर्ति को स्थिर और संतुलित रखा जा सके। उनके अनुसार, यह केवल व्यापारिक निर्णय नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा एक रणनीतिक कदम है।

इस दौरान भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए गए। गोर ने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील पर जल्द हस्ताक्षर होने की संभावना है और यह समझौता सिर्फ टैरिफ या व्यापार तक सीमित नहीं होगा, बल्कि दो लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापक सहयोग और साझा विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा, तकनीक और रणनीतिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के पास साथ मिलकर काम करने के कई अवसर मौजूद हैं।

रूसी तेल को लेकर हाल ही में अमेरिकी राजनीति में भी बयानबाजी तेज रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत रूस से तेल खरीद कम करने पर सहमत हो गया है, हालांकि भारत सरकार की ओर से इस तरह की किसी औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं रूस ने भी स्पष्ट किया है कि उसे नई दिल्ली की तरफ से तेल खरीद को लेकर किसी बदलाव की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।

भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता देता है। सस्ता और स्थिर तेल आपूर्ति भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए वह वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति अपनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत भविष्य में रूस, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिकी देशों सहित विभिन्न स्रोतों से तेल आयात बढ़ाकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।

कुल मिलाकर, अमेरिकी राजदूत के बयान ने यह संकेत जरूर दिया है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत अपनी ऊर्जा रणनीति को अधिक लचीला और बहुआयामी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी दबाव के बीच तेल कूटनीति आने वाले समय में और अधिक अहम भूमिका निभा सकती है।

Correspondent – Shanwaz Khan

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