भारत में बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों की तर्ज पर अब भारत में भी नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नए नियम बनाए जाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि सरकार विभिन्न सोशल मीडिया कंपनियों के साथ उम्र-आधारित नियमों को लेकर चर्चा कर रही है, ताकि बच्चों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।
पिछले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन और इंटरनेट की आसान उपलब्धता के कारण बच्चों और किशोरों की सोशल मीडिया पर सक्रियता तेजी से बढ़ी है। कम उम्र में ही बच्चे इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करने लगे हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक सोशल मीडिया के उपयोग से बच्चों में ऑनलाइन लत, ध्यान भटकना और साइबर बुलिंग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
सरकार का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित डिजिटल माहौल प्रदान करना है। अधिकारियों के अनुसार सोशल मीडिया पर गलत कंटेंट, फर्जी जानकारी और अनुचित गतिविधियों से नाबालिगों को बचाने के लिए ठोस नीति की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी दिशा में सरकार तकनीकी कंपनियों, नीति विशेषज्ञों और संबंधित हितधारकों से सुझाव ले रही है, ताकि संतुलित और प्रभावी नियम तैयार किए जा सकें।
दुनिया के कई देशों ने पहले ही बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े नियम लागू किए गए हैं, जिनमें आयु सत्यापन, कंटेंट मॉडरेशन और अभिभावकीय नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है। इन देशों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए भारत भी अपने यहां उपयुक्त ढांचा तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सरकार का कहना है कि फिलहाल यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में है और सभी पक्षों से विचार-विमर्श जारी है। उम्र के आधार पर सोशल मीडिया उपयोग की सीमा तय करने, बच्चों के लिए सुरक्षित मोड, समय सीमा और अभिभावकीय निगरानी जैसे विकल्पों पर भी चर्चा की जा रही है। हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में बच्चों के लिए विशेष गाइडलाइन या नई डिजिटल नीति लागू की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देना ज्यादा जरूरी है। नई नीति का उद्देश्य सोशल मीडिया के सकारात्मक पहलुओं को बनाए रखते हुए उसके नकारात्मक प्रभावों को कम करना होगा। यदि यह नीति लागू होती है तो इससे अभिभावकों को भी बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी और डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए अधिक जिम्मेदार और सुरक्षित बन सकेंगे।
Correspondent – Shanwaz Khan


