Thursday, March 5, 2026
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लोकसभा होने के बावजूद क्यों चुने जाते हैं राज्यसभा सांसद? जानिए क्या है इसकी भूमिका और चुनाव की प्रक्रिया

भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां संसद कानून बनाने की सर्वोच्च संस्था मानी जाती है। भारतीय संसद दो सदनों से मिलकर बनती है—लोकसभा और राज्यसभा। लोकसभा के सांसद सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं, जबकि राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष तरीके से चुने जाते हैं। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब लोकसभा पहले से मौजूद है और वह जनता का प्रतिनिधित्व करती है, तो फिर राज्यसभा की आवश्यकता क्यों पड़ती है।

दरअसल, भारत के संघीय ढांचे को मजबूत बनाने के लिए राज्यसभा की महत्वपूर्ण भूमिका है। लोकसभा जहां पूरे देश की जनता का प्रतिनिधित्व करती है, वहीं राज्यसभा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का मंच प्रदान करती है। इसी कारण इसे संसद का उच्च सदन भी कहा जाता है।

हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग ने मार्च 2026 में होने वाले राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों की अधिसूचना जारी की है। इस चरण में 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव कराए जाएंगे, क्योंकि ये सीटें अप्रैल में खाली होने वाली हैं। पूरे साल 2026 में अलग-अलग चरणों में कुल 72 सीटें खाली होंगी, जिनके लिए चुनाव आयोजित किए जाएंगे।

राज्यसभा की सबसे खास बात यह है कि यह एक स्थायी सदन है, यानी इसे कभी भंग नहीं किया जाता। इसके सदस्य छह साल के लिए चुने जाते हैं, लेकिन हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं। उनकी जगह नए सदस्यों का चुनाव कराया जाता है। इस व्यवस्था से संसद के कामकाज में निरंतरता बनी रहती है।

राज्यसभा का एक और महत्वपूर्ण काम यह है कि वह लोकसभा में पारित होने वाले विधेयकों की समीक्षा करती है। यदि किसी विधेयक में सुधार की जरूरत होती है तो राज्यसभा उसमें संशोधन का सुझाव दे सकती है। इससे जल्दबाजी में कानून बनने से बचाव होता है और कानून अधिक संतुलित और प्रभावी बन पाते हैं।

अब सवाल आता है कि राज्यसभा के सदस्य चुने कैसे जाते हैं। दरअसल, राज्यसभा के चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं कराए जाते। इसके सदस्य राज्यों की विधानसभाओं के चुने हुए विधायक यानी एमएलए द्वारा चुने जाते हैं। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर होता है।

इस प्रक्रिया में विधायक उम्मीदवारों को प्राथमिकता के आधार पर वोट देते हैं। यदि किसी उम्मीदवार को तय कोटा के बराबर पहली पसंद के वोट मिल जाते हैं तो वह निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। इस प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विधानसभा में जिस दल की जितनी ताकत है, उसी अनुपात में उसे राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिले।

राज्यसभा में कुछ सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा भी मनोनीत किया जाता है। ये वे लोग होते हैं जिन्होंने कला, साहित्य, विज्ञान, समाजसेवा या अन्य क्षेत्रों में विशेष योगदान दिया हो।

इस तरह लोकसभा और राज्यसभा मिलकर संसद की संतुलित और प्रभावी व्यवस्था बनाते हैं। लोकसभा जहां जनता की सीधी आवाज है, वहीं राज्यसभा राज्यों के हितों की रक्षा करने और कानूनों की गहन समीक्षा करने का काम करती है। यही कारण है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए दोनों सदनों की अपनी-अपनी अहम भूमिका है।

Correspondent – Shanwaz Khan

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