पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों की घोषणा के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग द्वारा चुनावी कार्यक्रम घोषित किए जाने के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर भी कई बड़े फैसले लिए गए हैं। राज्य सरकार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले किए हैं, जिसको लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है।
15 मार्च 2026 को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सहित असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान किया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल 2026 को होगा, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।
चुनावी कार्यक्रम घोषित होने के तुरंत बाद राज्य प्रशासन ने वरिष्ठ स्तर के पुलिस अधिकारियों में फेरबदल किया है। जानकारी के अनुसार डीजीपी और आईजी स्तर के कई अधिकारियों के साथ-साथ कोलकाता पुलिस कमिश्नर का भी तबादला किया गया है। नए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके और मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
इससे पहले भी राज्य के प्रिंसिपल सेक्रेटरी और चीफ सेक्रेटरी के स्तर पर बदलाव किए जा चुके हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावों को निष्पक्ष और हिंसामुक्त बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। आयोग का कहना है कि प्रशासनिक फेरबदल इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग द्वारा दो चरणों में मतदान कराने के फैसले का स्वागत किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं और जनता के बीच जाकर अपना काम और उपलब्धियां बताने का काम करेंगे। TMC की नेता सागरिका घोष ने कहा कि पार्टी चुनाव में मजबूती से उतरेगी और विपक्ष को कड़ी चुनौती देगी।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। BJP नेता गौरव वल्लभ ने दावा किया कि इस बार बंगाल की जनता बदलाव चाहती है और चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में राज्य में उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में गिरावट आई है और सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी।
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ ऐसे अधिकारी हैं जिनकी निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे अधिकारियों पर नजर रखी जानी चाहिए ताकि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से हो सके।
फिलहाल चुनाव की घोषणा के साथ ही बंगाल में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों की रैलियां, प्रचार अभियान और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अब सभी की नजर 4 मई 2026 पर टिकी है, जब चुनाव परिणाम सामने आएंगे और यह स्पष्ट होगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।
Correspondent – Shanwaz Khan


