अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार व्यवस्था को हिला देने वाले बयान दिए हैं। सोमवार, 8 दिसंबर 2025 को व्हाइट हाउस में किसानों और कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उन्होंने भारत और अन्य देशों पर अमेरिकी बाजार में चावल को “डंप” करने का आरोप लगाया। ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि यह स्थिति जारी रही तो वे भारत सहित संबंधित देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाकर इससे “बहुत जल्द” निपटेंगे।
बैठक में मौजूद ‘केनेडी राइस मिल’ की संचालक मेरिल केनेडी ने राष्ट्रपति को बताया कि दक्षिणी अमेरिका के चावल उत्पादक लगातार आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी निर्यातक अत्यंत कम दामों पर चावल बेचकर अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इस पर ट्रंप ने तुरंत पूछा कि आखिर कौन से देश ऐसा कर रहे हैं। केनेडी के अनुसार, “भारत और थाईलैंड सबसे बड़ी चुनौती हैं, जबकि चीन प्यूर्टो रिको में सस्ते दामों पर चावल बेच रहा है। प्यूर्टो रिको कभी अमेरिकी चावल के लिए सबसे बड़ा बाजार था, लेकिन अब वर्षों से वहां अमेरिकी चावल की आपूर्ति बंद है।”
केनेडी ने यह भी दावा किया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा पहले लगाए गए शुल्क कई मामलों में प्रभावी हुए हैं, लेकिन अमेरिकी किसानों को बचाने के लिए और मजबूत कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विदेशी प्रतिस्पर्धा के चलते स्थानीय किसान अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
इस बातचीत के बीच ट्रंप ने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को संबोधित करते हुए पूछा—“भारत को ऐसा करने की अनुमति क्यों है? उन्हें शुल्क देना चाहिए। क्या उन्हें चावल पर कोई विशेष छूट मिली हुई है?” इस पर बेसेंट ने स्पष्ट किया कि भारत को कोई विशेष छूट नहीं दी गई है और अमेरिका वर्तमान में भारत के साथ व्यापारिक समझौतों पर बातचीत कर रहा है। केनेडी ने यह भी जानकारी दी कि भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में एक मामला पहले से चल रहा है।
ट्रंप ने इस विवाद का समाधान “बहुत आसान” बताते हुए कहा कि अवैध रूप से कम दाम पर सामान बेचने वाले देशों पर उच्च शुल्क लगाकर समस्या तुरंत समाप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा, “आपकी समस्या एक दिन में हल हो जाएगी। हमें बस मुकदमे में जीत हासिल करनी है, और शुल्क का उपयोग कर हम इसे नियंत्रित कर लेंगे।”
भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है। ‘इंडियन राइस एक्सपोर्ट्स फेडरेशन’ के अनुसार भारत की वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी लगभग 28 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक निर्यात में 2024-25 में उसकी हिस्सेदारी 30.3 प्रतिशत रही। भारतीय चावल की कई किस्में अमेरिका सहित कई देशों में लोकप्रिय हैं, जिनमें ‘सोना मसूरी’ प्रमुख है। इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन ने भारत से आने वाले चावल पर 50 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया है, जो दुनिया में सबसे अधिक माना जाता है। इसमें रूस से तेल आयात पर लगाया गया 25 प्रतिशत टैरिफ भी शामिल है।
ट्रंप के इस नए बयान ने संकेत दिया है कि अमेरिकी-भारतीय व्यापार संबंध एक नई कसौटी पर खड़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका भारत के खिलाफ टैरिफ और बढ़ाता है, तो इसका असर वैश्विक चावल व्यापार, दोनों देशों के आर्थिक संबंधों और कृषि बाजारों पर गहरा पड़ सकता है। फिलहाल, दोनों देशों के बीच वार्ता जारी है, लेकिन ट्रंप की चेतावनी से यह स्पष्ट है कि विवाद जल्द ही नए मोड़ पर पहुँच सकता है।
Correspondent – Shanwaz khan


