भ्रष्टाचार पर उठे सवाल, नए नैरेटिव की तलाश में भाजपा
पटना: बिहार की राजनीति में पहली बार भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में खड़ी है और उसके पास वर्तमान में 80 विधायक हैं। यह संख्या जितनी बड़ी उपलब्धि दिखती है, उतनी ही बड़ी चुनौती भी है। 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 80 या उससे अधिक सीटें बरकरार रखनी है, जो आसान नहीं होगा। अगर पार्टी 102-103 सीटों पर चुनाव लड़ती है तो उसे करीब 68% की स्ट्राइक रेट की जरूरत पड़ेगी।
भ्रष्टाचार बना सबसे बड़ा सिरदर्द
चुनाव से पहले भाजपा की छवि पर सबसे बड़ा सवाल भ्रष्टाचार को लेकर उठ रहा है। प्रशांत किशोर ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा की साख बचाने के लिए पार्टी को अब एक नए नैरेटिव की तलाश करनी होगी। जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए साफ-सुथरे उम्मीदवार उतारने और जिन विधायकों के खिलाफ क्षेत्र में नाराजगी है, उनकी जगह नए चेहरों को मौका देने की चर्चा है।
जातीय समीकरण बनाम आरोप
बिहार की राजनीति में जातीय ताकत अक्सर भ्रष्टाचार के आरोपों से भारी पड़ती है। सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं, और भाजपा ने उन्हें इसी वोट बैंक के लिए आगे बढ़ाया है। अगर भाजपा उन पर कार्रवाई करती है तो कुशवाहा और अति पिछड़े वर्ग में असंतोष फैल सकता है। यही कारण है कि पार्टी ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर चल रही है।
ठोस सबूत आए तो मुश्किलें बढ़ेंगी
फिलहाल भाजपा को राहत यही है कि जिन नेताओं पर आरोप हैं, वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहे। लेकिन अगर भ्रष्टाचार से जुड़े ठोस दस्तावेज या कानूनी मामले सामने आते हैं तो चुनाव में बड़ा नुकसान संभव है। चारा घोटाले के बाद लालू यादव को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ा था।
नए चेहरों पर दांव
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 110 सीटों में से 30 पर नए चेहरों को मौका दिया था और 74 सीटें जीती थीं। उस समय उसका स्ट्राइक रेट 67% से अधिक रहा था। अब 2025 में भी पार्टी को नए उम्मीदवारों और मजबूत जातीय समीकरण पर भरोसा करना होगा।


