बांग्लादेश की नई सरकार के सत्ता में आते ही व्यापार नीति को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते की समीक्षा का फैसला लेकर अंतरिम सरकार के दौर में लिए गए निर्णयों पर पुनर्विचार के संकेत दिए हैं। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया, जिसके बाद वैश्विक व्यापार माहौल में नई हलचल पैदा हो गई है।
सरकार के इस रुख से साफ संकेत मिलते हैं कि ढाका अब अमेरिका के साथ हुए समझौते को जल्दबाजी में लागू करने के बजाय उसके हर पहलू का गहन विश्लेषण करना चाहता है। बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्रालय के डब्ल्यूटीओ विंग की सचिव खदीजा नाजनीन ने कहा कि सरकार पहले अमेरिका के साथ किए गए व्यापार समझौते का विस्तार से अध्ययन करेगी और उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस समझौते में एग्जिट क्लॉज शामिल है, जिसके तहत तय शर्तों के अनुसार किसी भी समय समझौते को समाप्त किया जा सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि इस एग्जिट क्लॉज का उल्लेख विशेष रूप से बांग्लादेश के समझौते में ही किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार के पास नीति के अनुरूप निर्णय लेने की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है। उल्लेखनीय है कि 9 फरवरी को मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अमेरिका के साथ इस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य अमेरिकी बाजार तक पहुंच बनाए रखना था।
वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस समझौते की वैधता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि अदालत के निर्णय के चलते टैरिफ से जुड़े कई प्रावधान स्वतः अप्रभावी हो सकते हैं, ऐसे में सरकार समझौते को रद्द करने या उसमें संशोधन करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रही है।
बांग्लादेश उन चुनिंदा देशों में शामिल था जिन्होंने अमेरिका के साथ पारस्परिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत टैरिफ दर 20 प्रतिशत से घटाकर 19 प्रतिशत कर दी गई थी। इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में घटाकर 35 प्रतिशत किया गया और फिर वार्ता के बाद और कम किया गया।
चूंकि अमेरिका बांग्लादेश का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, इसलिए इस समझौते की समीक्षा का निर्णय देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात नीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि रहमान सरकार अंतिम रूप से इस समझौते को जारी रखती है, संशोधित करती है या पूरी तरह खत्म करने का फैसला लेती है।
Correspondent – Shanwaz Khan


