Monday, March 2, 2026
Google search engine
Homeटॉप स्टोरीपंचायतीराज चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 31 मई से पहले हर हाल...

पंचायतीराज चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 31 मई से पहले हर हाल में चुनाव कराने का आदेश

हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रदेश में पंचायत चुनाव 31 मई से पहले हर हाल में कराए जाएं। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि पुनर्सीमांकन या अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर संवैधानिक संस्थाओं के चुनाव को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकता।

दरअसल, राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दाखिल की थी, जिसमें 30 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए गए थे। हाईकोर्ट ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने राहत की मांग करते हुए सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव समय पर कराना संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसे किसी भी स्थिति में लंबे समय तक टाला नहीं जा सकता। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पुनर्सीमांकन की प्रक्रिया चुनाव टालने का वैध आधार नहीं बन सकती, खासकर तब जब स्थानीय निकायों का कार्यकाल प्रभावित हो रहा हो।

सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि प्रदेश में हाल के महीनों में भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई इलाकों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। सड़कों की मरम्मत और राहत कार्य अभी भी जारी हैं, ऐसे में चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा। सरकार ने यह भी कहा कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू है, जो संसद द्वारा बनाया गया कानून है, जबकि पंचायतीराज अधिनियम राज्य का कानून है, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में आपदा कानून को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना और कहा कि आपदा की स्थिति के बावजूद चुनावी प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जा सकता। अदालत के इस आदेश के बाद अब राज्य चुनाव आयोग और प्रशासन पर समयबद्ध तरीके से चुनावी तैयारियां पूरी करने का दबाव बढ़ गया है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह फैसला अहम माना जा रहा है, क्योंकि पंचायत चुनावों में देरी को लेकर पहले से ही विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा था। अब सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया को लेकर तेजी आने की उम्मीद है और प्रशासन को तय समय सीमा के भीतर चुनाव संपन्न कराने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

Correspondent Shanwaz Khan

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments