मध्य प्रदेश में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR 2025) ने इस बार बड़ी हलचल मचा दी है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, एक ही रिवीजन में 42 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन हटाए गए नामों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं अधिक है।
एक ही रिवीजन में 42.74 लाख नाम हटाए गए
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर 23 दिसंबर 2025 को अपलोड किए गए डेटा के अनुसार, SIR 2025 के दौरान वोटर लिस्ट से कुल 42.74 लाख नाम हटाए गए हैं। वहीं करीब 8.40 लाख वोटरों को “अनमैप्ड” श्रेणी में रखा गया है, यानी उनकी जानकारी को सत्यापित या लोकेट नहीं किया जा सका। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि राज्य में मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया अब और सख्त मानकों के तहत की जा रही है।
महिलाओं के नाम ज्यादा हटे
लिंग आधारित आंकड़ों पर गौर करें तो तस्वीर और भी चौंकाने वाली है। रिवीजन के दौरान 26.64 लाख महिला वोटरों के नाम सूची से हटाए गए, जबकि पुरुष वोटरों में यह संख्या 19.19 लाख रही। इसका मतलब है कि मतदाता सूची से हटाए गए कुल नामों में महिलाओं का हिस्सा लगभग 58 प्रतिशत तक पहुंच गया।
शादी के बाद माइग्रेशन है बड़ी वजह
चुनाव आयोग से जुड़े अफसरों के मुताबिक, महिलाओं के नाम हटने की सबसे बड़ी वजह शादी के बाद माइग्रेशन है। जब महिलाएं विवाह के बाद दूसरे जिले या राज्य में स्थानांतरित होती हैं, तब बहुत सी बार वे अपने वोटर कार्ड या अन्य पहचान दस्तावेज़ अपडेट नहीं करातीं। ऐसे में जब डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन टीम संबंधित पते पर पहुंचती है और वोटर वहां नहीं मिलती, तो उसका नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
शहरी इलाकों में सबसे बड़ा असर
डेटा से पता चलता है कि इस बार शहरी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नाम कटे हैं। राजधानी भोपाल में लगभग 4.38 लाख वोटरों के नाम हटाए गए, जबकि इंदौर में 1.75 लाख नाम हटाए गए। अधिकांश मामलों में कारण “पते से अनुपस्थित” यानी माइग्रेशन बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 31.51 लाख वोटरों के नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि वे अपने रजिस्टर्ड पते पर नहीं मिले। इसके अलावा, 8.46 लाख नाम मतदाताओं की मृत्यु के कारण हटाए गए, जबकि 2.77 लाख वोटरों के नाम डुप्लिकेट एंट्री होने की वजह से हटाए गए।
रोल क्लीनअप की प्रक्रिया जारी
अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का रोल संशोधन रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका मकसद वोटर लिस्ट को सटीक और पारदर्शी बनाना है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर नाम हटने से राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह रिवीजन संतुलित तरीके से लागू किया गया या नहीं।
Corrospondent – Shanwaz Khan


