केरल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मुख्यमंत्री पद के दावेदार होने की अटकलों पर विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि चूंकि वे खुद चुनाव नहीं लड़ रहे, इसलिए यह पद उनके लिए नहीं है। थरूर ने पीटीआई-भाषा को दिए साक्षात्कार में यूडीएफ की मजबूत स्थिति का भरोसा जताया।
विधानसभा चुनाव से दूरी, प्रचार पर फोकस
शशि थरूर ने साफ कहा, ‘मैं मुख्यमंत्री पद का दावेदार नहीं हूं।’ इसका प्रमुख कारण यह है कि वे तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य हैं और विधानसभा चुनाव लड़ने का इरादा नहीं रखते। आदर्श रूप से उनका मानना है कि मुख्यमंत्री चुने हुए विधायकों में से ही होना चाहिए।
गुरुवार 19 मार्च 2026 को दिए साक्षात्कार में थरूर ने बताया कि उनकी भूमिका राज्यव्यापी प्रचार में होगी। वे राज्य के कोने-कोने का दौरा करेंगे, खासकर प्रचार समिति के सह-अध्यक्ष के रूप में। संसद सत्र के बाद वे केरल में डेरा डाल लेंगे और सभी 14 जिलों में सक्रिय रहेंगे।
राहुल गांधी की हालिया यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने तिरुवनंतपुरम में दिए गए भाषण को यादगार बताया। थरूर ने कहा कि टीम वर्क अब मजबूत है, जैसा राहुल ने ‘एक लय-ताल’ की सलाह दी थी।
यूडीएफ की संभावनाएं, 85-100 सीटों का लक्ष्य
थरूर ने 140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ के लिए 85 से 100 सीटों का आंकड़ा ‘काफी अच्छा’ बताया। हालांकि पूर्ण बहुमत की खुशी होगी, लेकिन यह लक्ष्य व्यावहारिक है। क्रिकेट की गुगली का उदाहरण देते हुए कहा कि LDF मुश्किल पिच पर है और UDF उन्हें कैच कर लेगी।
एलडीएफ के 10 साल के शासन के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर है। आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार घोटाले और नाकामियां मतदाताओं को विमुख कर रही हैं। कांग्रेस का एजेंडा युवाओं के लिए बेहतर अवसर, समावेशी विकास और मिशन पर केंद्रित है।
पार्टी की गहरी जड़ें हर मोहल्ले, गांव और वार्ड में हैं, इसलिए चेहरा 없이 भी जीत संभव है। थरूर ने असम में गौरव गोगोई जैसे चेहरों का उदाहरण दिया, लेकिन केरल में पार्टी चिह्न पर फोकस रहेगा।
सीएम चेहरा न होने पर खुली राय
थरूर ने स्वीकार किया कि राष्ट्रपति-शैली के चुनावों में चेहरा महत्वपूर्ण होता है। पिनराई विजयन जैसे LDF के चेहरे के मुकाबले UDF को नुकसान हो सकता है। फिर भी पार्टी नेतृत्व का फैसला है कि चुनाव पार्टी के लिए लड़ा जाएगा, जीत बाद नेता चुने जाएंगे।
आलाकमान विधायकों से सलाह लेकर निर्णय लेगा। थरूर ने कहा, ‘कांग्रेस ने पहले कभी चेहरा घोषित नहीं किया, लेकिन केरल की मजबूती इसे संभव बनाएगी।’ मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद टीम एकजुट है।
चुनाव कार्यक्रम पर गंभीर आरोप
9 अप्रैल को एक चरणीय मतदान और 4 मई को गिनती की घोषणा को थरूर ने चौंकाने वाला बताया। 15 मार्च की देरी से प्रचार के लिए महज तीन हफ्ते मिले। अधिकांश पार्टियां उम्मीदवार घोषित भी नहीं कर पाईं, नामांकन सोमवार तक हैं।
यह जानबूझकर LDF (केरल), भाजपा (असाम) और पुडुचेरी की स्थानीय सरकारों को फायदा पहुंचाने का प्रयास लगता है। ये तीनों राज्यों में 9 अप्रैल को ही voting है। निर्वाचन आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया।
कांग्रेस की ताकत और चुनौतियां
कांग्रेस की राज्य में गहरी पैठ है, जो चेहरा न होने पर भी चुनाव जितवा सकती है। थरूर ने कहा कि पार्टी आलोचना ही नहीं, सकारात्मक विजन लेकर आई है। युवाओं के भविष्य, विकास और नई दिशा पर जोर।
पिछले चुनाव में LDF की दोबारा जीत असामान्य थी, क्योंकि दशकों से मोर्चे बारी-बारी सत्ता में आते रहे। अब UDF पुनरुत्थान की ओर है। थरूर प्रचार समिति में ऑनलाइन बैठकें कर रहे हैं।
मसले राज्य के हैं, निजी नहीं। वे पूरी तरह टीम का हिस्सा हैं। केरल चुनाव महत्वपूर्ण हैं, जीत से कांग्रेस मजबूत होगी।
भविष्य की रणनीति और आत्मविश्वास
थरूर ने कहा कि सांसदों के विधानसभा लड़ने की अटकलें हैं, लेकिन अंतिम फैसला नेतृत्व का। पार्टी के लिए यह पूंजी हो सकती है। UDF का राजनीतिक पुनरुत्थान हो रहा है।
मतदाता LDF की नाकामियों से त्रस्त हैं। कांग्रेस सकारात्मक एजेंडा लेकर जीतेगी। थरूर का आत्मविश्वास साफ है- ‘हम जीतेंगे।’ प्रचार में उनकी भूमिका निर्णायक होगी।
यह चुनाव केरल के भविष्य का निर्धारण करेगा। UDF तैयार है हर चुनौती के लिए।
Correspondent – Shanwaz Khan


