उत्तर प्रदेश में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत आम लोगों को बड़ी राहत दी गई है। अब नागरिक अपने नाम जोड़ने, संशोधन कराने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए पहले से ज्यादा समय पा सकेंगे। राज्य में यह प्रक्रिया Election Commission of India के दिशा-निर्देशों पर Uttar Pradesh में लागू की जा रही है, और अब इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 6 मार्च कर दी गई है।
पहले यह समयसीमा फरवरी के अंत तक तय की गई थी, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों की ओर से आ रही शिकायतों और तकनीकी समस्याओं को देखते हुए प्रशासन ने अवधि बढ़ाने का फैसला किया है। कई जिलों से यह फीडबैक मिला था कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से फॉर्म भरने में लोगों को दिक्कतें हो रही थीं, खासकर ग्रामीण इलाकों में।
क्यों बढ़ाई गई समयसीमा?
अधिकारियों के मुताबिक, SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को ज्यादा सटीक और पारदर्शी बनाना है। इसमें मृत मतदाताओं के नाम हटाना, नए मतदाताओं को जोड़ना और गलत प्रविष्टियों को सुधारना शामिल है।
हालांकि, बड़ी आबादी वाले राज्य में इतने कम समय में सभी दावे-आपत्तियों का निपटारा कर पाना मुश्किल साबित हो रहा था। कई लोग जरूरी दस्तावेज समय पर जुटा नहीं पा रहे थे, वहीं कुछ क्षेत्रों में फॉर्म वितरण और अपलोडिंग में देरी की शिकायतें भी सामने आईं।
कौन कर सकता है दावा या आपत्ति?
इस प्रक्रिया के तहत नागरिक:
- नया नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं
- गलत उम्र, पता या नाम में सुधार करा सकते हैं
- किसी मृत या स्थानांतरित मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं
इन सभी के लिए संबंधित फॉर्म अब 6 मार्च तक जमा किए जा सकते हैं, चाहे वह बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के माध्यम से हों या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और जल्द से जल्द अपने दस्तावेजों के साथ आवेदन पूरा कर लें। अधिकारियों का कहना है कि समयसीमा बढ़ाना सिर्फ सुविधा के लिए है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रह जाए।
क्यों है SIR प्रक्रिया अहम?
मतदाता सूची किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव की रीढ़ होती है। अगर इसमें गलतियां होती हैं तो न सिर्फ लोगों के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ता है, बल्कि चुनावी पारदर्शिता पर भी सवाल उठते हैं।
SIR के जरिए सरकार और चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में हो और अपात्र प्रविष्टियां हटाई जाएं। यही वजह है कि दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया को गंभीरता से लेने और ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
अब देखना होगा कि बढ़ी हुई समयसीमा में कितने लोग इस अवसर का लाभ उठाते हैं और मतदाता सूची को कितना ज्यादा सटीक बनाया जा पाता है।
Uttar Pradesh – Piyush Dhar Diwedi


