नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के भाषण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। पीएम मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए भागवत के संबोधन को “प्रेरणादायक” बताया और कहा कि इसमें राष्ट्र निर्माण में आरएसएस के योगदान और भारत की जन्मजात क्षमताओं पर प्रकाश डाला गया है।
पीएम मोदी ने की सराहना
पीएम मोदी ने लिखा,
“परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का एक प्रेरणादायक संबोधन, जिसमें राष्ट्र निर्माण में आरएसएस के समृद्ध योगदान पर प्रकाश डाला गया है और हमारे देश की जन्मजात क्षमता पर जोर दिया गया है ताकि वह गौरव की नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सके, जिससे पूरे विश्व को लाभ हो।”
गौरतलब है कि मोदी 1980 के दशक में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने से पहले आरएसएस के प्रचारक रह चुके हैं।
भागवत का संदेश
आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मोहन भागवत ने गुरुवार को अपने संबोधन में व्यक्तिगत चरित्र निर्माण और अनुशासन आधारित नागरिकों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संघ की शाखाएं केवल संगठन का ढांचा नहीं, बल्कि मूल्य-संचालित समाज निर्माण की आधारशिला हैं।
भागवत ने कहा:
- “हम अभी भी उन राजनीति और ढांचों के भीतर काम कर रहे हैं, जिनकी अपर्याप्तताएं उजागर हो चुकी हैं।”
- “लंबे समय में हमें धीरे-धीरे बदलाव करना होगा।”
- “हमें एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण के आधार पर सफल विकास मॉडल तैयार करना होगा और उसे दुनिया के सामने रखना होगा।”
क्या है संकेत?
संघ प्रमुख का यह बयान सरकार और समाज दोनों के लिए “नसीहत” के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि भारत को चुनौतियों से बचने के लिए पुराने ढांचों से बाहर निकलकर नए विकास मॉडल की ओर बढ़ना होगा।


