Monday, March 2, 2026
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SAARC पर पाकिस्तान का भारत पर हमला: “भारत ने संगठन ठप किया”, चीन–बांग्लादेश के साथ नया क्षेत्रीय गठबंधन तैयार करने की कोशिश

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि SAARC के निष्क्रिय होने की सबसे बड़ी वजह भारत है, जबकि यह मंच दक्षिण एशिया की सामूहिक प्रगति और संवाद के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। पाकिस्तानी बयान ने दोनों देशों के रिश्तों में फिर से तनाव का संकेत दिया है।

पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अन्दराबी ने कहा कि भारत लगातार SAARC की प्रक्रिया को बाधित करता रहा है और इसी कारण संगठन अपनी मूल भूमिका नहीं निभा पा रहा। उन्होंने दावा किया कि भारत यह कहकर दुनिया को भ्रमित करता है कि SAARC बैठक इसलिए नहीं हो पा रही क्योंकि इसे इस्लामाबाद में आयोजित किया जाना था। अन्दराबी ने यह भी कहा कि भारत पहले भी कई बार SAARC के शिखर सम्मेलन को रोक चुका है, विशेष रूप से 1990 के दशक में।

इसी बीच यह भी खबर है कि पाकिस्तान चीन और बांग्लादेश के साथ मिलकर एक नया South Asia Regional Group तैयार करने की योजना बना रहा है। इसे विश्लेषक भारत के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव को संतुलित करने की पाकिस्तानी रणनीति के रूप में देख रहे हैं। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने भी संकेत दिए कि ढाका ऐसे किसी नए क्षेत्रीय मंच की संभावना का अध्ययन कर रहा है।

SAARC की निष्क्रियता हाल के वर्षों में बड़ी चिंता का विषय रही है। आठ देशों—भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, मालदीव, भूटान और अफगानिस्तान—का यह संगठन कभी दक्षिण एशिया की सामूहिक आवाज माना जाता था। लेकिन 2014 के काठमांडू शिखर सम्मेलन के बाद दो साल में होने वाली बैठकें लगातार रद्द होती गईं। इसकी प्रमुख वजह भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ता राजनीतिक तनाव और आतंकवाद के मुद्दे पर टकराव रही है।

भारत की ओर से पाकिस्तान के ताज़ा आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया अब तक नहीं आई है। हालांकि भारत पहले कई बार यह स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पार आतंकवाद और हिंसा के माहौल में SAARC आगे नहीं बढ़ सकता। भारत का मानना है कि जब तक पाकिस्तान क्षेत्र में भरोसे और शांति का वातावरण नहीं बनाता, तब तक किसी नई SAARC बैठक की संभावना नहीं है।

पाकिस्तान के नए गठबंधन बनाने की कोशिशों और SAARC पर आरोपों से स्पष्ट है कि दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति एक बार फिर नई दिशा में जा रही है, जिसका प्रभाव आने वाले वर्षों में और गहरा हो सकता है।

Correspondent – Shanwaz khan
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