इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के साथ जारी तनाव और संभावित युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष लोगों की अपेक्षा से कहीं ज्यादा जल्दी समाप्त हो सकता है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस संकट की आशंकाओं के बीच उनका यह बयान राहत देने वाला माना जा रहा है।
गुरुवार (20 मार्च, 2026) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल इस संघर्ष में बढ़त बना रहा है और ईरान की सैन्य व परमाणु क्षमताएं तेजी से कमजोर हो रही हैं। उनके मुताबिक, ईरान अब न तो प्रभावी रूप से यूरेनियम संवर्धन कर पा रहा है और न ही बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण में सक्षम है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व में अस्थिरता और आंतरिक संघर्ष की स्थिति बन रही है।
नेतन्याहू ने ईरान के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा समय में यह स्पष्ट नहीं है कि देश को वास्तव में कौन नियंत्रित कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि शीर्ष स्तर पर सत्ता संघर्ष चल रहा है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार, इस आंतरिक कमजोरी का असर जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे रहा है।
इजरायली प्रधानमंत्री ने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा गया कि इजरायल ने अमेरिका को इस संघर्ष में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता अपने फैसले खुद लेते हैं और उन्हें कोई निर्देश नहीं देता। नेतन्याहू के अनुसार, अमेरिका और इजरायल की सेनाएं तथा खुफिया एजेंसियां मिलकर रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि ईरान के गैस क्षेत्र पर हमला इजरायल का स्वतंत्र निर्णय था। इसके जवाब में ईरान ने कतर के गैस हब को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया। हालांकि, नेतन्याहू ने यह भी कहा कि बाद में ट्रंप के अनुरोध पर आगे के हमलों को रोकने का निर्णय लिया गया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) को लेकर उठ रही चिंताओं पर भी नेतन्याहू ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की कोशिशें असफल होंगी। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम हिस्सा है और इसे बंद करना पूरी दुनिया को आर्थिक दबाव में लाने की कोशिश होगी।
नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ब्लैकमेल करने की रणनीति अपना रहा है, लेकिन इजरायल और उसके सहयोगी देश इसे सफल नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि इजरायल की कार्रवाई केवल अपनी सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट और वैश्विक स्थिरता के लिए है।
अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि स्थिति जल्द नियंत्रण में आ जाएगी और वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा भी टल जाएगा। उनके इस बयान से अंतरराष्ट्रीय बाजारों और देशों को कुछ हद तक राहत की उम्मीद जरूर मिली है, हालांकि जमीनी हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं।
Correspondent – Shanwaz Khan


