केंद्र सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच सांसद करण भूषण सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि वह जिस स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं, उसका UGC के हालिया नियमों से कोई सीधा संबंध नहीं है और इस मुद्दे पर गलत तरीके से उनका नाम जोड़ा जा रहा है।
सांसद करण भूषण सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि नई शिक्षा नीतियों और UGC के नियमों को तैयार करने में उनकी समिति की भूमिका रही है, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी स्टैंडिंग कमेटी का कार्यक्षेत्र अलग विषयों से जुड़ा है और शिक्षा से जुड़े इन नियमों पर उसका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एक स्वायत्त संस्था है, जो उच्च शिक्षा से जुड़े नियम और दिशा-निर्देश तैयार करती है। इन नियमों पर विचार-विमर्श अलग स्तर पर होता है और संसदीय समितियों की भूमिका भी अलग-अलग विषयों के अनुसार तय होती है। ऐसे में किसी भी सांसद या समिति को बिना तथ्य जाने जिम्मेदार ठहराना गलत है।
करण भूषण सिंह ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाना जनता का अधिकार है, लेकिन तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। इससे न सिर्फ जनप्रतिनिधियों की छवि प्रभावित होती है, बल्कि जनता के बीच भी गलत संदेश जाता है।
UGC के नए नियमों को लेकर देश के कई विश्वविद्यालयों, शिक्षकों और छात्र संगठनों में नाराजगी देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में कदम बता रहे हैं, तो वहीं कई संगठन इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला मान रहे हैं। इसी विवाद के बीच सांसद करण भूषण सिंह का यह बयान सामने आया है, जिससे स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की गई है।
उन्होंने अंत में कहा कि वह हमेशा पारदर्शिता और सही जानकारी के पक्षधर रहे हैं और आगे भी संसद के भीतर और बाहर जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाते रहेंगे। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत और सच्चाई की जांच जरूर करें।
कुल मिलाकर, करण भूषण सिंह का यह बयान UGC नियमों को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच एक अहम स्पष्टीकरण माना जा रहा है, जिससे कई तरह की अटकलों पर विराम लग सकता है।
Correspondent – Shanwaz Khan


