Monday, March 30, 2026
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मुंबई की मेयर रितू तावडे को अदालत से राहत नहीं, मारपीट मामले में आरोप तय होने का रास्ता साफ

मुंबई की मेयर और बीजेपी नेता रितू तावडे को एक पुराने मामले में अदालत से बड़ा झटका लगा है। वर्ष 2016 में स्कूल शिक्षकों के साथ कथित मारपीट के मामले में कोर्ट ने उन्हें आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद अब उनके खिलाफ मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी और उन पर औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

यह मामला 29 जुलाई 2016 का है, जब वाकोला इलाके में स्थित नगर निगम के एक उर्दू माध्यम स्कूल में विवाद हुआ था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह विवाद एक महिला शिक्षक के तबादले को लेकर शुरू हुआ था, जो उस समय गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। आरोप है कि रितू तावडे कुछ अन्य लोगों के साथ स्कूल पहुंचीं और इस मुद्दे पर प्रबंधन के साथ तीखी बहस हुई।

अभियोजन का कहना है कि बहस के दौरान स्थिति बिगड़ गई और आरोपियों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ अपशब्द कहे। इसी दौरान दो शिक्षकों के साथ कथित रूप से मारपीट भी की गई। इस घटना के बाद 11 अगस्त 2016 को पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। हालांकि, बचाव पक्ष ने एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी पर सवाल उठाते हुए इसे संदिग्ध बताया था।

इस मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वाई. पी. मनाठकर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पीड़ितों के बयान आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि अन्य गवाहों ने भी अपने बयानों में रितू तावडे की भूमिका का उल्लेख किया है। न्यायाधीश के अनुसार, पीड़ितों ने स्पष्ट रूप से उन्हें उस व्यक्ति के रूप में पहचाना है, जिसने स्कूल परिसर में उनके साथ मारपीट की।

रितू तावडे ने अपनी याचिका में दावा किया था कि वह संयोगवश घटनास्थल पर मौजूद थीं और उनका इस पूरे घटनाक्रम से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी राजनीतिक पहचान का दुरुपयोग करते हुए शिकायतकर्ता ने उन्हें गलत तरीके से इस मामले में फंसाया है। उनके अनुसार, यह एक निजी विवाद था, जिसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई।

वहीं, अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक ने अदालत में दलील दी कि पीड़ितों के बयान स्पष्ट रूप से यह दर्शाते हैं कि तावडे ने शिक्षकों के साथ मारपीट की थी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि स्कूल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की घटना बेहद गंभीर मानी जानी चाहिए, क्योंकि यह जगह बच्चों के शिक्षण और संस्कार का केंद्र होती है।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है और आरोप तय किए जाने चाहिए। ऐसे में तावडे को इस स्तर पर राहत देने से इनकार कर दिया गया।

अब इस मामले में अगला चरण ट्रायल का होगा, जहां अदालत में सबूतों और गवाहों के आधार पर सुनवाई होगी। यह फैसला न केवल रितू तावडे के लिए कानूनी चुनौती बढ़ाने वाला है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी इसके दूरगामी असर हो सकते हैं।

Mumbai – Piyush Dhar Diwedi

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