मोदी सरकार ने देश की बहुप्रतीक्षित जनगणना प्रक्रिया को गति देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जनगणना और उससे जुड़ी तकनीकी व प्रशासनिक तैयारियों के लिए 11,718 करोड़ रुपये के विशाल बजट को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय न केवल देशभर में जनसंख्या के सटीक आंकड़े जुटाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि कृषि क्षेत्र सहित कई महत्वपूर्ण योजनाओं को सीधे प्रभावित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले वर्षों में सरकार की नीतियों के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मंजूर हुआ बजट?
भारत में आखिरी जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी और 2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण बार-बार टलती चली गई। ऐसे में अब सरकार ने आधुनिक तकनीक, डिजिटल डेटा संग्रहण और नए सिस्टम की सहायता से जनगणना को और अधिक सटीक व व्यापक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। मंजूर किए गए बजट में डेटा कलेक्शन, डिजिटल उपकरण, प्रशिक्षण, सर्वे टीम, सुरक्षा तंत्र और तकनीकी ढांचे पर खर्च किया जाएगा।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “यह जनगणना अब तक की सबसे बड़ी और सबसे आधुनिक जनगणना होगी। हर नागरिक, हर परिवार और सामाजिक-आर्थिक वर्ग का डेटा डिजिटल तरीके से दर्ज किया जाएगा।”
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
इस फैसले का सीधा असर भारत के करोड़ों किसानों पर पड़ने वाला है। नई जनगणना में कृषि से जुड़े डेटा को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इससे—
- फसल पैटर्न,
- भूमि स्वामित्व,
- खेती योग्य भूमि,
- कृषि आय,
- सिंचाई सुविधाओं
जैसी महत्वपूर्ण जानकारी को अधिक सटीक तरीके से दर्ज किया जा सकेगा।
इन आंकड़ों की मदद से सरकार किसानों के लिए अधिक प्रभावी नीतियां बना सकेगी। पीएम किसान सम्मान निधि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कृषि ऋण, ग्रामीण विकास योजनाएं और फसल बीमा जैसे कार्यक्रमों में भी अधिक पारदर्शिता और सटीकता आएगी।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नए आंकड़े आने के बाद कृषि क्षेत्र से जुड़े फैसले डेटा-आधारित होंगे, जिससे किसानों को वास्तविक लाभ मिलेगा। कई किसान संगठनों ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सरकार को ग्रामीण समस्याओं को बेहतर समझने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
डिजिटल जनगणना—एक बड़ा बदलाव
नई जनगणना पूर्णतः डिजिटल और मोबाइल-आधारित होगी। सरकारी कर्मचारियों को विशेष ऐप और टैबलेट के माध्यम से सर्वे का कार्य दिया जाएगा। इससे—
- डेटा तेजी से एकत्र होगा,
- त्रुटियां कम होंगी,
- रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे,
- और विश्लेषण आसान हो जाएगा।
इसके साथ ही नागरिकों को भी स्वयं अपना डेटा मोबाइल ऐप के माध्यम से अपडेट करने की सुविधा देने की योजना है।
क्षेत्रीय विकास योजनाओं को मिलेगा लाभ
जनगणना के ताज़ा आंकड़े शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सुरक्षा, बुजुर्गों की देखभाल और शहरी विकास जैसी योजनाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। सरकार इन आंकड़ों के आधार पर संसाधनों का बेहतर वितरण कर सकेगी और जरूरतमंद क्षेत्रों पर अधिक फोकस कर पाएगी।
निष्कर्ष
11,718 करोड़ रुपये के इस बजट को मंजूरी के साथ भारत ने एक नए और डिजिटल जनगणना युग की ओर कदम बढ़ा दिया है। यह फैसला न केवल प्रशासनिक सुधार का संकेत है, बल्कि किसानों और आम नागरिकों के लिए भी कई नए अवसर लेकर आएगा। आगामी महीनों में जनगणना की तैयारियां और भी तेजी पकड़ने की उम्मीद है।
| Correspondent – Shanwaz khan |


