पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव फरवरी 2026 में अचानक तेज हो गया है और दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बन गई है। 21 फरवरी से शुरू हुई झड़पें अब और उग्र हो चुकी हैं, जिसमें हवाई हमले, तोपखाना फायरिंग और सीमा पार सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं। हालिया घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के दावे कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, 27 फरवरी की सुबह पाकिस्तान ने अपने सैन्य अभियान के तहत अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य सीमा पार सक्रिय आतंकी ठिकानों और सशस्त्र ठिकानों को निशाना बनाना था। पाकिस्तानी सूचना मंत्री ने दावा किया कि कार्रवाई में बड़ी संख्या में तालिबान से जुड़े अधिकारियों और लड़ाकों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
पाकिस्तान की ओर से यह भी कहा गया है कि अभियान के दौरान कई सैन्य पोस्ट, हथियार डिपो और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, सीमा पार से हो रही गतिविधियों और हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई है। रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अभियान अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
दूसरी ओर अफगान तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तान के दावों को लेकर कड़ा विरोध जताया है और जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तानी हमलों के जवाब में अफगान बलों ने सीमा के नजदीकी क्षेत्रों में पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। अफगान पक्ष का दावा है कि जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सैनिकों को नुकसान पहुंचा है और कुछ पोस्टों पर कब्जा भी किया गया है, हालांकि इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अफगानिस्तान के रक्षा अधिकारियों के अनुसार, सीमा के हेलमंद, कंधार और अन्य दक्षिणी क्षेत्रों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अफगान पक्ष का कहना है कि उनके क्षेत्रों में हुए हमलों से सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जबकि नागरिक इलाकों के प्रभावित होने की भी आशंका जताई जा रही है। कुछ रिपोर्टों में विस्थापित लोगों के शिविरों के पास धमाकों और ड्रोन हमलों की भी जानकारी सामने आई है, जिसमें कई लोग घायल होने की खबर है।
झड़पों का मुख्य केंद्र दुरंद रेखा (Durand Line) के आसपास का इलाका बताया जा रहा है, जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से विवादित सीमा रही है। पाकिस्तान की ओर खैबर पख्तूनख्वा के मोहमंद, कुर्रम और बाजौर सेक्टर में गतिविधियां तेज हुई हैं, जबकि अफगानिस्तान की ओर नंगरहार, पाक्तिया, पाक्तिका, खोस्त, कंधार और हेलमंद जैसे प्रांतों में सैन्य हलचल बढ़ी है। दोनों ओर से सीमा पर भारी सैन्य तैनाती और गोलाबारी की घटनाएं सामने आई हैं।
हताहतों को लेकर दोनों देशों के दावे एक-दूसरे से काफी अलग हैं। पाकिस्तान का कहना है कि उसकी कार्रवाई में विरोधी पक्ष को भारी नुकसान हुआ है, जबकि अपने नुकसान को सीमित बताया गया है। वहीं अफगान पक्ष का दावा है कि उसने पाकिस्तानी हमलों का प्रभावी जवाब दिया और कई सैनिकों को मार गिराया। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और स्वतंत्र स्रोतों ने इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है और वास्तविक स्थिति को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव सीमा सुरक्षा, आतंकी गतिविधियों और आपसी अविश्वास से जुड़ा हुआ है, जो समय-समय पर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा करता रहा है। मौजूदा हालात में सीमा पार गांवों और आम नागरिकों पर भी इसका असर पड़ रहा है, क्योंकि लगातार हो रही गोलाबारी और सैन्य कार्रवाई से लोगों में भय का माहौल है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है और दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से यह टकराव बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। यदि स्थिति जल्द नियंत्रित नहीं हुई, तो इसका असर पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से सख्त बयानबाजी जारी है और सीमा पर हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
Correspondent – Shanwaz Khan


