Tuesday, March 3, 2026
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बीजेपी विधायक संजय पाठक की कंपनियों पर बड़ी कार्रवाई, ओवर माइनिंग मामले में 443 करोड़ की वसूली का अंतिम नोटिस जारी

जबलपुर में बीजेपी विधायक संजय पाठक से जुड़ी खनन कंपनियों पर ओवर माइनिंग के आरोपों के बीच प्रशासन ने 443 करोड़ रुपये की वसूली के लिए अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। यह नोटिस आनंद माइनिंग, निर्मला मिनरल्स और पेसिफिक एक्सपोर्ट्स को भेजा गया है। इन कंपनियों पर स्वीकृत सीमा से कई गुना अधिक लौह अयस्क उत्खनन का आरोप है, जिसके बाद पूरा मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में आ गया है।

इस कार्रवाई की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं विधानसभा में इस जुर्माने की पुष्टि कर चुके हैं। प्रशासन को सौंपी गई 467 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में विभाग ने सैटेलाइट इमेज, DGPS मैपिंग और डिस्पैच रजिस्टर की जांच के आधार पर उत्खनन में भारी अनियमितताएं पाई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अनुमत क्षेत्र की तुलना में आठ से दस गुना अधिक खनन किया गया, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर 10 नवंबर को इन कंपनियों को अंतिम नोटिस जारी किया गया। संजय पाठक की कंपनियों ने जवाब में गणना से संबंधित आधार दस्तावेज मांगे थे, जिन्हें विभाग ने उपलब्ध करा दिया है।

नहीं मिला जवाब तो होगी कुर्की की कार्रवाई
अधिकारियों का कहना है कि नोटिस के जवाब के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। लेकिन यदि कंपनियां निर्धारित समयसीमा में संतोषजनक उत्तर नहीं देतीं, तो प्रशासन कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर देगा। माइनिंग विभाग RRC जारी करने की तैयारी में भी है।
प्रशासन का यह भी कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर मिली अनियमितताओं को अनदेखा करना संभव नहीं है। इस कार्रवाई ने प्रदेश के खनन कारोबारियों में भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पहली बार सत्ताधारी दल के किसी विधायक से जुड़ी कंपनियों पर इतना बड़ा जुर्माना लगाया गया है।

संजय पाठक की चुप्पी से बढ़ी अटकलें
मामले पर विधायक संजय पाठक ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिसके चलते अटकलें और तेज हो गई हैं। सरकार द्वारा अपने ही पार्टी के विधायक की कंपनियों पर सख्त कार्रवाई ने इस प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे की कार्रवाई किस गति और निष्पक्षता के साथ करता है। यह मामला न केवल राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है, बल्कि राज्य में खनन गतिविधियों की निगरानी, नियमों की सख्ती और पारदर्शिता पर भी नए सवाल खड़े कर रहा है।

Correspondent – Shanwaz khan

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