महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने 13 नगर निगमों में कुल 125 सीटें जीतकर अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को दर्ज किया है। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने स्पष्ट कर दिया है कि AIMIM न तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जाएगी और न ही विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा बनेगी।
हैदराबाद में मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि उनकी राजनीति सत्ता के जोड़-तोड़ पर नहीं, बल्कि जनता के भरोसे पर आधारित है। उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई उन लोगों के लिए है, जिन्होंने हमें जनादेश दिया है। हम किसी भी तरह की राजनीतिक सौदेबाजी में शामिल नहीं होंगे।”
सामाजिक विविधता बना जीत का आधार
ओवैसी ने इस जीत को पार्टी के कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की मेहनत का नतीजा बताया। उन्होंने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि AIMIM अब केवल एक समुदाय तक सीमित पार्टी नहीं रही। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में दलित, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े कई हिंदू उम्मीदवार भी पार्टी के टिकट पर जीतकर आए हैं। उनके अनुसार, यही सामाजिक विविधता AIMIM की बढ़ती ताकत का सबसे बड़ा प्रमाण है।
मराठवाड़ा और विदर्भ के इलाकों में पार्टी ने मजबूत पकड़ बनाई है। छत्रपति संभाजीनगर में 33 सीटों पर जीत दर्ज कर AIMIM भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। सोलापुर जैसे शहरों में भी पार्टी ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जबकि मुंबई महानगरपालिका (BMC) में 8 सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
‘बी-टीम’ के आरोपों पर तीखा पलटवार
विपक्षी दलों द्वारा AIMIM को ‘BJP की बी-टीम’ कहे जाने पर ओवैसी ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप लगाने वाले असल में उन लाखों मतदाताओं का अपमान कर रहे हैं, जिन्होंने AIMIM पर भरोसा जताया है। ओवैसी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान न करने वालों का राजनीतिक पतन तय है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी अनुशासन से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने अकोट का उदाहरण देते हुए कहा कि AIMIM के किसी भी पार्षद को भाजपा से जुड़े किसी भी समूह का समर्थन करने की इजाजत नहीं है। पार्टी पहले भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई कर चुकी है और आगे भी यही नीति जारी रहेगी।
पश्चिमी महाराष्ट्र पर आत्ममंथन
ओवैसी ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि पश्चिमी महाराष्ट्र में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा कि अगर वहां और अधिक समय दिया जाता, तो नतीजे बेहतर हो सकते थे। इसके बावजूद उन्होंने हारने वाले उम्मीदवारों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि राजनीति में हार-जीत से ज्यादा जरूरी जनता के लिए किए गए वादों को निभाना है।
उन्होंने अपने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों से अपील की कि वे जमीन से जुड़े रहें, जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दें और सेवा को अपनी राजनीति का आधार बनाएं। उनके अनुसार, जीत से बड़ी जिम्मेदारी जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना है।
2029 से पहले बड़ा संकेत
जनवरी 2026 में हुए 29 नगर निगमों के चुनावों को 2029 के विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम संकेतक माना जा रहा है। AIMIM ने पिछली बार की 56 सीटों की संख्या को बढ़ाकर 125 तक पहुंचाकर यह दिखा दिया है कि वह अब महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में एक गंभीर और प्रभावशाली ताकत बन चुकी है।
ओवैसी का संदेश साफ है—AIMIM अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ आगे बढ़ेगी। न भाजपा के साथ और न ही INDIA गठबंधन के साथ। पार्टी का दावा है कि वह आने वाले समय में जनता के भरोसे के बल पर और मजबूत होकर उभरेगी।
Correspondent – Shanwaz khan


