Wednesday, March 4, 2026
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नागपुर नगर निगम चुनाव में फूटा महाविकास अघाड़ी का ‘गांठ’, कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी अलग लड़ेंगी

महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में दरार एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। नागपुर नगर निगम चुनाव को लेकर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी–शरद पवार गुट) के बीच सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई। नतीजतन, शरद पवार की पार्टी ने घोषणा की है कि वह नागपुर में कांग्रेस से अलग होकर चुनाव मैदान में उतरेगी।

सीट बंटवारे पर नहीं बन पाई सहमति

एनसीपी (शरद पवार गुट) के नागपुर अध्यक्ष दुनेश्वर पेठे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सहयोगी दल के साथ बैठकें तो कीं, लेकिन अंतिम समय में सहयोग का रुख बदल दिया। उन्होंने कहा, “हमने शुरुआत में 25 सीटों की मांग की थी, बाद में समझौते के तहत 15 सीटों पर तैयार हो गए, फिर भी कांग्रेस नेताओं ने हमारी मांग को नजरअंदाज कर दिया। सोमवार रात तक बातचीत चली, लेकिन उसके बाद उन्होंने हमारे कॉल तक उठाने बंद कर दिए। इसका मतलब साफ है कि कांग्रेस गठबंधन नहीं चाहती।”

पेठे ने यहां तक आरोप लगाया कि “कांग्रेस का यह रुख कहीं न कहीं बीजेपी की मदद करने वाला कदम लगता है।” उन्होंने दावा किया कि शरद पवार गुट अब अपने दम पर मजबूत प्रदर्शन करेगा।

बीजेपी का गढ़ रहा है नागपुर

नागपुर नगर निगम में पिछले तीन चुनावों से भारतीय जनता पार्टी का दबदबा कायम है।

  • 2007, 2012 और 2017 — इन तीनों चुनावों में बीजेपी ने नगर निगम पर कब्जा जमाए रखा।
  • 2017 के चुनाव में 151 सीटों में से 108 सीटें बीजेपी को मिलीं।
  • कांग्रेस को 28, बसपा को 10, शिवसेना (अविभाजित) को 2 और एनसीपी (अविभाजित) को 1 सीट हासिल हुई थी।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विपक्षी दलों में एकता की कमी का सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है, जो लगातार चौथी बार जीत का लक्ष्य लेकर मैदान में उतर रही है।

चुनाव कार्यक्रम घोषित

महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव 15 जनवरी 2026 को होंगे, जबकि मतगणना अगले दिन यानी 16 जनवरी को की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 दिसंबर थी, और नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख 2 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। वहीं 3 जनवरी को प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी की जाएगी।

राज्य में इन चुनावों को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक “राजनीतिक लिटमस टेस्ट” के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि नागपुर में कांग्रेस और एनसीपी (SP) के अलग-अलग लड़ने के फैसले से बीजेपी को कितना फायदा होता है।

Corrospondent – Shanwaz khan

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