Monday, March 2, 2026
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रिटायरमेंट के बाद राजनीति में जाने को लेकर जस्टिस बीआर गवई का बड़ा बयान, बोले—‘गवर्नर या राज्यसभा का पद स्वीकार नहीं करूंगा’

मुख्य न्यायाधीश (CJI) पद से रिटायर होने के बाद जस्टिस बीआर गवई ने अपने भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगा दिया है। नए सीजेआई सूर्यकांत के पदभार संभालने के बाद जस्टिस गवई ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि वह न तो राजनीति में जाने की सोच रहे हैं और न ही उन्हें किसी संवैधानिक पद में रुचि है।

सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त होने के बाद इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में जस्टिस गवई ने कहा कि फिलहाल उनका कोई प्लान नहीं है और वह सिर्फ शांतिपूर्वक समय बिताना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “मैं बस अभी शांति में हूं। मैंने अभी कुछ नहीं करने का फैसला किया है। मेरा मानना है कि इंसान को आज के हिसाब से जीना चाहिए।”

‘गवर्नर या राज्यसभा का पद स्वीकार नहीं करूंगा’

रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आने की अटकलों पर उन्होंने साफ कहा कि वे राजनीति में कदम रखने का मन नहीं रखते। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “मैं किसी ट्रिब्यूनल का प्रमुख नहीं बनूंगा। मैं कोई गवर्नर का पद स्वीकार नहीं करूंगा। मैं राज्यसभा में नामांकन भी स्वीकार नहीं करूंगा। इस बारे में मैं बहुत स्पष्ट हूं।”

इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि जस्टिस गवई उन रिटायर्ड जजों में शामिल नहीं होना चाहते जो सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद राजनीतिक या संवैधानिक पदों पर नियुक्ति स्वीकार करते हैं।

330 से अधिक फैसलों में रहे शामिल

जस्टिस गवई ने बतौर सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अपने कार्यकाल में 330 से अधिक मामलों में हिस्सा लिया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसलों में अहम भूमिका निभाई। जस्टिस संजीव खन्ना के बाद उन्होंने अंतरिम रूप से सीजेआई का पद संभाला था और मौखिक रूप से मामलों का तत्काल उल्लेख (मेंशनिंग) की अनुमति देने की प्रथा को फिर से शुरू किया था।

नए सीजेआई सूर्यकांत की कार्यशैली पर भी की चर्चा

इंटरव्यू में जस्टिस गवई ने नए चीफ जस्टिस सूर्यकांत की कार्यशैली की भी सराहना की। 24 नवंबर को अपने पहले ही दिन सीजेआई सूर्यकांत ने एक नई प्रक्रिया लागू की कि तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए मामलों का जिक्र लिखित रूप में किया जाए। मृत्यु दंड और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मामलों में ही मौखिक आग्रह स्वीकार किए जाएंगे।

पहले दिन ही उन्होंने करीब दो घंटे तक 17 मामलों की सुनवाई की, जिससे उनके तेज और अनुशासित कार्यशैली के संकेत मिलते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में मामलों को तत्काल सूचीबद्ध करने की मौखिक परंपरा पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना ने समाप्त कर दी थी, लेकिन जस्टिस गवई ने इसे फिर बहाल किया था। अब नवीन प्रक्रिया के साथ सीजेआई सूर्यकांत ने न्यायिक व्यवस्थाओं में स्पष्टता और अनुशासन पर जोर दिया है।

जस्टिस गवई के ताज़ा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह रिटायरमेंट के बाद एक शांत और निजी जीवन जीना चाहते हैं तथा किसी राजनीतिक या संवैधानिक भूमिका को अपनाने की उनकी कोई इच्छा नहीं है।

Correspondent – Shanwaz khan

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