Wednesday, March 4, 2026
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जनकपुरी हादसे पर सियासत और सिस्टम पर सवाल: जांच कमेटी गठित, परिवार ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

दिल्ली के जनकपुरी इलाके में खुले गड्ढे में गिरकर बाइक सवार युवक कमल की मौत के बाद प्रशासनिक लापरवाही को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए Delhi Jal Board ने जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया है और शाम तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। वहीं, मृतक के परिजनों और दोस्तों ने पुलिस पर समय पर मदद न करने और खोज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

हादसा 5 फरवरी की रात उस समय हुआ जब कमल अपने घर लौट रहा था। बताया जा रहा है कि सड़क पर बिना किसी बैरिकेडिंग या चेतावनी के छोड़े गए गहरे गड्ढे में उसकी बाइक फिसलकर गिर गई। परिजनों का दावा है कि अगर समय रहते प्रशासन सक्रिय होता और तलाश अभियान ठीक से चलाया जाता, तो शायद कमल की जान बचाई जा सकती थी।

“यह सीधी लापरवाही है” — भाई का आरोप

मृतक के भाई करण ने बताया कि आखिरी बार कमल से बात होने पर उसने कहा था कि वह सिर्फ 10–15 मिनट में घर पहुंच जाएगा। लेकिन जब आधे घंटे बाद भी फोन नहीं उठा तो परिवार घबरा गया और उसकी तलाश शुरू की गई। सबसे पहले वे उसके ऑफिस पहुंचे, फिर Janakpuri थाने गए।

करण का आरोप है कि पुलिस ने सिर्फ मोबाइल की आखिरी लोकेशन बताकर कहा, “200 मीटर के अंदर खुद ढूंढ लो।” न तो किसी तरह की टीम भेजी गई और न ही इलाके को घेरकर सर्च ऑपरेशन किया गया। उन्होंने बताया कि रात करीब डेढ़ बजे वे उस गड्ढे के पास भी पहुंचे थे, लेकिन तब वहां कुछ नजर नहीं आया।

“24 घंटे बाद ही शिकायत होगी”

मृतक के दूसरे भाई ने बताया कि जब वे पुलिस स्टेशन पहुंचे तो उनसे कहा गया कि गुमशुदगी की शिकायत 24 घंटे बाद ही दर्ज की जा सकती है। परिवार ने बार-बार अनुरोध किया कि फोन ट्रैक कर तुरंत खोज शुरू की जाए।

उन्होंने कहा, “पहले हमें लोकेशन भेजी गई, फिर उसे डिलीट कर दिया गया। जब दोबारा पूछा तो कहा गया कि यह गोपनीय जानकारी है और दोबारा नहीं दी जा सकती।” इस रवैये से परिवार और ज्यादा परेशान हो गया और पूरी रात वे खुद ही इधर-उधर खोजते रहे।

दोस्तों का आरोप — सिस्टम पूरी तरह फेल

कमल के दोस्तों ने भी प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सड़क पर इतना बड़ा गड्ढा छोड़ दिया गया था, न कोई चेतावनी बोर्ड था और न ही बैरिकेडिंग। रात में अंधेरे के कारण वहां हादसे का खतरा और बढ़ गया था।

एक दोस्त ने कहा कि पूरी रात वे पुलिस से मदद मांगते रहे, लेकिन हर बार यही कहा गया कि खुद तलाश करो। परिवार को बार-बार कमल की मां से झूठ बोलना पड़ा कि वह अस्पताल में है ताकि वह घबरा न जाए। दोस्तों के मुताबिक यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम की नाकामी है।

सुबह मिला शव, टूटा परिवार

अगली सुबह जब परिवार ने कमल के फोन पर दोबारा कॉल किया तो पुलिस ने फोन उठाकर बताया कि उसका शव उसी गड्ढे से बरामद कर लिया गया है। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

भाई करण ने कहा, “कमल कोई लापरवाह इंसान नहीं था जो जानबूझकर ऐसे गड्ढे में गिर जाए। हमने कम से कम छह थानों में मदद मांगी, लेकिन कहीं से कोई सहयोग नहीं मिला।”

जांच कमेटी से उम्मीद

अब दिल्ली जल बोर्ड द्वारा गठित जांच कमेटी से उम्मीद की जा रही है कि वह यह स्पष्ट करेगी कि गड्ढा क्यों खुला छोड़ा गया था, जिम्मेदार विभाग कौन था और समय पर सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

परिवार की मांग है कि सिर्फ जांच नहीं बल्कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में किसी और को ऐसी कीमत न चुकानी पड़े। यह मामला एक बार फिर राजधानी की सड़कों की बदहाल स्थिति और आपात स्थितियों में प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

Correspondent – Shanwaz Khan

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