Friday, March 6, 2026
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कला जगत को अपूरणीय क्षति: ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के शिल्पकार राम सुतार का 100 वर्ष की उम्र में निधन

भारतीय कला और मूर्तिकला के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिखने वाले महान मूर्तिकार राम सुतार का बुधवार, 17 दिसंबर को निधन हो गया। 100 वर्ष की आयु में उन्होंने गुरुग्राम स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। उम्र से जुड़ी बीमारियों के कारण वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन के साथ ही भारतीय कला जगत में एक युग का अंत हो गया है।

राम सुतार के निधन की पुष्टि उनके पुत्र अनिल सुतार ने की। उन्होंने बताया कि बुधवार देर रात उनके पिता का शांतिपूर्वक देहांत हुआ। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार, 18 दिसंबर को सुबह 11 बजे किया जाएगा। जैसे ही यह खबर सामने आई, देश-विदेश में कला प्रेमियों और दिग्गज हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

महाराष्ट्र से था गहरा जुड़ाव

राम सुतार का जन्म वर्ष 1925 में महाराष्ट्र के गोंदूर गांव में हुआ था, जो वर्तमान में धुले जिले का हिस्सा है। बचपन से ही उनका रुझान कला की ओर था। साधारण परिवार से आने वाले राम सुतार ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उन्होंने मुंबई के प्रतिष्ठित जेजे स्कूल ऑफ आर्ट एंड आर्किटेक्चर से शिक्षा प्राप्त की और गोल्ड मेडल हासिल किया। यहीं से उनके उज्ज्वल करियर की नींव पड़ी।

भारतीय मूर्तिकला को दी नई पहचान

राम सुतार को पत्थर और धातु में जान फूंक देने वाला कलाकार कहा जाता था। उनके हाथों से बनी मूर्तियां केवल शिल्प नहीं, बल्कि इतिहास और भावना की जीवंत अभिव्यक्ति थीं। संसद परिसर में स्थापित ध्यानमग्न मुद्रा में महात्मा गांधी की प्रतिमा, घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य मूर्ति और सरदार वल्लभभाई पटेल की ऐतिहासिक ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ उनकी अमर कृतियों में शामिल हैं।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से रचा इतिहास

गुजरात में स्थापित सरदार पटेल की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इस ऐतिहासिक परियोजना ने राम सुतार को वैश्विक पहचान दिलाई। यह प्रतिमा न केवल उनकी कला का शिखर है, बल्कि भारत की एकता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक भी मानी जाती है।

सम्मान और विरासत

राम सुतार को उनके अतुलनीय योगदान के लिए 1999 में पद्म श्री और 2016 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। हाल ही में उन्हें महाराष्ट्र का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘महाराष्ट्र भूषण’ भी प्रदान किया गया।
उनके निधन से भले ही एक महान कलाकार विदा हो गया हो, लेकिन उनकी मूर्तियां और कला आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।

Correspondent – Shanwaz khan

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