मध्य प्रदेश के इंदौर में पानी की दूरुस्त आपूर्ति और जल गुणवत्ता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भगीरथपुरा इलाके में पीने के पानी में दूषित पानी मिलने से होने वाली बिमारियों और मौतों का मामला अब सियासी रूप ले चुका है। स्थानीय निवासियों और राजनीतिक दलों के बीच इस मामले को लेकर तीखी बहस जारी है, जिसमें सरकार पर मृत्यु आंकड़ों को कम पेश करने और सही जानकारी छिपाने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों से मिलने इंदौर का दौरा किया और राज्य सरकार पर जुर्माना इल्ज़ाम लगाए।
दूषित पानी से स्वास्थ्य संकट और मौतें
भगीरथपुरा इलाके में पिछले कुछ हफ्तों से पीने के पानी में बैक्टीरिया और सीवेज मिलावट जैसी दिक्कतों के कारण दस्त, उल्टी और पेट संबंधी गंभीर बिमारियाँ फैलनी शुरू हुईं। स्थानीय लोगों का दावा है कि दूषित पानी पीने से अब तक दर्जनों लोग, जिसमें वृद्ध और छोटे बच्चे भी शामिल हैं, की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती हुए हैं। कुछ रिपोर्टों में दावे किए जा रहे हैं कि मौतों की संख्या 20 से अधिक हो सकती है, लेकिन राज्य प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर कम मौतों की पुष्टि की है और संक्रमण को स्थानीय पानी आपूर्ति की खराबी से जोड़कर देखा जा रहा है।
आधिकारिक जांच के दौरान एक डेथ ऑडिट रिपोर्ट में भी कहा गया है कि कम से कम 15 मौतों को इसी पानी संबंधी बीमारी से जोड़ा जा सकता है, जबकि कुछ मौतें अन्य कारणों से भी हुई हों। प्रशासन ने पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है और एक जांच समिति गठित की गई है, जो एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
सरकार पर आंकड़े छिपाने और लापरवाही के आरोप
स्थानीय निवासियों और विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार मृत्युदर और स्वास्थ्य संकट की गंभीरता को कम करके पेश कर रही है। उनका कहना है कि साफ पानी की कमी और जल पाइपलाइन की खराबी को समय रहते ठीक नहीं किया गया, जिससे यह संकट उत्पन्न हुआ। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि जल आपूर्ति की सुस्ती के मामले में प्रशासन पहले से शिकायतों को बहुत हल्के में ले रहा था।
इसी के साथ, कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर सूचना छिपाने और पीड़ित परिवारों को पर्याप्त सहायता न देने का आरोप लगाया है। दल का कहना है कि मृतकों और गंभीर रूप से बीमार पड़े लोगों के आंकड़ों को कम दिखाया जा रहा है ताकि प्रशासनिक जिम्मेदारियों से बचा जा सके।
राहुल गांधी का इंदौर दौरा
इसी विवाद के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदौर का दौरा किया और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने भगीरथपुरा और आसपास के इलाकों का दौरा कर पीड़ितों का दर्द सुना और सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि यह संकट सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जिम्मेदारी की विफलता है। उन्होंने राज्य सरकार की “स्मार्ट सिटी” रणनीति और बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी कटु शब्दों में निशाना बनाया और कहा कि अगर मूलभूत आवश्यकताओं को सही तरीके से नहीं सुलझाया गया, तो नागरिकों की जिंदगी खतरे में पड़ेगी।
कांग्रेस नेताओं ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की और आगे समाधान की मांग को लेकर सरकार को घेरने की बात कही। इंदौर दौरे के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि साफ पानी देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इसे पूरा न करना प्रशासन की गंभीर लापरवाही है।
सत्तापक्ष का रुख
वहीं, मध्य प्रदेश सरकार और बीजेपी नेताओं का कहना है कि प्रशासन पूरी स्थिति को संभाल रहा है और मामले में राजनीति न करने की अपील की गई है। कुछ नेताओं ने राहुल गांधी पर “दुर्घटना पर राजनीति” करने का आरोप भी लगाया है। सरकार ने प्रभावित इलाकों में चिकित्सा सहायता, जल वितरण के वैकल्पिक इंतजाम और जांच कमेटी गठन किया है, जिसका उद्देश्य कारणों की तह तक पहुंचना है और ऐसी त्रासदियों से बचने के उपाय करना है।
आगे की दिशा
अब प्रमुख सवाल यह है कि इंदौर के पानी संकट और मौतों का मामला किस स्तर पर सुलझेगा, और क्या इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में सुधार होगा। पीड़ितों का कहना है कि केवल आर्थिक मुआवजे से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्थायी और सुरक्षित पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। प्रशासन इस बोझिल स्थिति से निकलने के उपायों पर काम कर रहा है और जांच जारी है।
MP – Piyush Dhar Diwedi


